हाहाकार
हाहाकार वहां है, जहां खबर नहीं है
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अरुण कमल
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अरुण कमल
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Saturday, December 16, 2017
संग्राम बड़ा भीषण होगा
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हिंदी के कवि रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता हैं जिसमें ये पंक्ति आती है कि ‘ याचना नहीं अब रण होगा संग्रम बड़ा भीषण होगा। दिनकर की ये पं...
Saturday, October 17, 2015
अकादमी में पारदर्शिता का सवाल
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जितने लोगों ने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाए हैं उनमें से ज्यादातर वामपंथी हैं और ये पूरा मामला कहीं ना कहीं राजनीति से प्रेरित है । यह ...
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