हाहाकार

हाहाकार वहां है, जहां खबर नहीं है

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Sunday, April 3, 2016

खत्म होती विधा को संजीवनी !

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हिंदी साहित्य में कई ऐसी विधाएं हैं जो वक्त के साथ साथ हाशिए पर चली गई जैसे तकनीक के फैलाव ने पत्र साहित्य का लगभग खात्मा कर दिया है । ए...
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मेरे बारे में...

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अनंत विजय
पेशे से पत्रकार। फिल्म पर सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (स्वर्ण कमल)। राजनीति, सिनेमा और साहित्य में गहरी रुचि।
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