हाहाकार
हाहाकार वहां है, जहां खबर नहीं है
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ऋचा अनिरुद्ध
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ऋचा अनिरुद्ध
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Monday, November 24, 2008
फुर्सत के रात दिन......ऋचा अनिरुद्ध
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अपने एयर कंडीशन्ड ऑफिस की कांच की बंद खिड़की से आज झांक कर बाहर देखा..तो अचानक दिल बैठ सा गया। एक पल के लिए अपना सारा बचपन आंखो के सामने घूम...
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