हाहाकार
हाहाकार वहां है, जहां खबर नहीं है
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पाखी
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Friday, March 13, 2020
असमय चला गया प्रतिभाशाली कथाकार
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हिंदी के प्रतिभाशाली लेखक, कहानीकार और संपादक प्रेम भारद्वाज ने बहुत ही कम उम्र में दुनिया छोड़ दी। हिंदी साहित्य में जब राजेन्द्र यादव ...
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Saturday, September 8, 2018
साहित्यिक विवाद का वधस्थल फेसबुक
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साहित्यिक पत्रिका ‘ पाखी ’ में छपे हिंदी के लेखक-अध्यापक विश्वनाथ त्रिपाठी से की गई बातचीत पर जारी विवाद के बीच मशहूर कथाकार ह्रषिकेश ...
Saturday, August 25, 2018
सवालों के घेर में ‘व्योमकेश दरवेश’
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राजेन्द्र यादव के जीवित रहते साहित्यिक परिदृश्य जीवंत बना रहता था। वो अपनी पत्रिका हंस में या अन्यत्र भी अपनी टिप्पणियों या अपने साक्षा...
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Monday, February 15, 2016
वीराने में टहलती यादों की परछाइयां
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निदा फाजली ने अपनी किताब ‘ तमाशा मेरे आगे ’ की भूमिका में मैडम बॉवेरी को याद करते हुए कहा है कि – ‘ काश मेरे पास इतना पैसा होता कि सार...
Wednesday, January 16, 2013
अमिताभ से कसाब की तुलना नाजायज
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हिंदी की साहित्यिक पत्रिका पाखी पिछले करीब दो महीनों से हिंदी जगत में विवादों के केंद्र में है । पहले तो उसने रांची में रह रहे हिंदी के बु...
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