हाहाकार
हाहाकार वहां है, जहां खबर नहीं है
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रजनी गुप्त
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रजनी गुप्त
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Saturday, October 6, 2018
विवाद से उठते बड़े सवाल
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हिंदी साहित्य को लेकर फेसबुक पर बहुधा ऐसे विवाद उठते रहते हैं जिनका लक्ष्य किसी लेखक को नीचा दिखाना होता है। फेसबुकिया विवादों से साहित...
Sunday, April 5, 2015
स्त्री विमर्श का अछूता प्रदेश
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त्रिया चरित्रम पुरसस्य भाग्यम । दैवो ना जानि कुतो मुनष्यम । रजनी गुप्त के नए उपन्यास कठघरे को पढ़ते हुए संस्कृत का ये श्लोक शिद्दत से या...
Monday, May 19, 2014
राजनीति, महिला और विद्रूपता
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राजेन्द्र यादव को अपने जीवन काल में इस बात का अफसोस था कि राजनीतिक हत्या पर हिंदी में कोई उपन्यास नहीं लिखा गया । वो हमेशा कहते थे कि हि...
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Thursday, August 29, 2013
बीस की कहानी
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समकालीन साहित्यक परिदृश्य में स्त्री विमर्श के नाम पर लेखिकाओं की एक ऐसी फौज खड़ी हो गई है जो प्रसद्धि के लिए तमाम तरह के दंद फंद से भी न...
Saturday, August 25, 2012
हिंदी के युवा लेखकों से उम्मीद
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हिंदी में सालों से प्रकाशक और लेखक दोनों पाठकों की कमी का रोना रोते रहते हैं । बहुत शोर मचता है कि हिंदी के पाठक कम हो रहे हैं । हिंदी क...
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