हाहाकार

हाहाकार वहां है, जहां खबर नहीं है

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Sunday, January 31, 2021

पचास की 'पाकीजा'

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आपके पांव देखे, बहुत हसीन हैं, इन्हें जमीन पर मत उतारिएगा, मैले हो जाएंगे। फिल्म ‘पाकीजा’ ये संवाद बहुधा सुनाई देता है। ये भी सुनने को मिलता...
Monday, February 13, 2017

मोहब्बत की मिसाल 'पाकीजा'

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कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो काल से होड़ लेती हुई कालजयी हो जाती हैं । ऐसी ही एक फिल्म है ‘ पाकीज़ा ’ । आज से करीब साठ साल पहले यानि सत्...
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अनंत विजय
पेशे से पत्रकार। फिल्म पर सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (स्वर्ण कमल)। राजनीति, सिनेमा और साहित्य में गहरी रुचि।
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