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Tuesday, August 22, 2023

लकीरों में मिलना था


कोयंबटूर में आजाद फिल्म की शूटिंग चल रही थी। संभवत: 1954 की बात है। दिलीप कुमार शूटिंग के सिलसिले में वहां थे। उनसे मिलने जेमिनी स्टूडियो के एस एस वासन साहब पहुंचे। उस दौर में दिलीप कुमार की आशिकी के चर्चे फिल्मी पत्रिकाओँ में खूब छपा करते थे। उनकी उम्र 32 साल हो चुकी थी लेकिन शादी नहीं हुई थी। वासन ने उनसे कहा कि चलो एक ज्योतिष के पास चलते हैं और उनसे पूछते हैं। दोनों ज्योतिष के पास पहुंचे। ज्योतिष ने दिलीप कुमार की एक कुंडली बनाई और फिर उनके करियर और परिवार के बारे में बताने लग गए। दिलीप कुमार ज्योतिष की बातें सुनकर चकित थे। अचानक वासन साहब ने ज्योतिष से कहा कि ये बताइए की इनकी शादी कब होगी। ज्योतिष थोड़ी देर चुप रहे, दिलीप कुमार के चेहरे को देखा, फिर हथेली की लकीरों को और कहा कि इनकी शादी चालीस वर्ष की उम्र पार करने के बाद होगी और लड़की इनसे आधी उम्र की होगी। ज्योतिष ने ये भी भविष्यवाणी की थी कि वो फिल्म इंडस्ट्री से होगी। ये सुनकर दिलीप कुमार ने जोरदार ठहाका लगाया और कहा कि इंडस्ट्री की लड़की से तो वो कभी शादी नहीं करेंगे। बात आई गई हो गई लंबा अरसा बीत गया। एक दिन नसीम बानो ने दिलीप कुमार को फोन करके सायरा बानो की जन्मदिन पार्टी में आने का न्योता दिया। दिलीप साहब जन्मदिन की पार्टी में पहुंचे और सायरा को देखते ही दिल दे बैठे। इसके पहले वो सायरा को बच्ची समझते थे और लगातार उनके साथ फिल्म में काम करने से मना कर रहे थे।  उधर सायरा के दिल में उनके लिए प्रेम अंकुरित होकर बढ़ने लगा था। सायरा बानो बेहद साफ बोलनेवाली महिला हैं। जब दिलीप कुमार ने समंदर किनारे उनको प्रपोज किया था और शादी की बात की थी तब भी सायरा ने उनसे पूछ लिया था कि शादी की बात वो कितनी लड़कियों से कर चुके हैं। जल्द ही दोनों का विवाह गो गया। जब विवाह हो रहा था तो दिलीप कुमार को अचानक कोयंबटूर के ज्योतिष की बात याद आ गई थी। 

विदेश में पढ़ी लिखी और संपन्न परिवार की लड़की सायरा जब शादी करके ससुराल आई थी तो उसको अपनी ननदों के तानों का सामना करना पड़ा था लेकिन वो घर को जोड़े रही थीं। उस समय तक वो बेहद सफल और लोकप्रिय अभिनेत्री हो चुकी थी। देव आनंद, राजकपूर, राजेन्द्र कुमार आदि के साथ उनकी फिल्में सिनेमाघरों में धूम मचा चुकी थीं लेकिन ये दिलीप कुमार की बहनों की समज में नहीं आ रही थी और वो सायरा को लगातार तंग करते थे। दिलीप कुमार चाहते थे कि अलग घर लेकर रहें लेकिन सायरा चाहती थीं कि परिवार एक साथ रहे। और ऐसा ही हुआ भी। दिलीप कुमार की एक बहन थी अख्तर। उसने के आसिफ से विवाह कर लिया था जिससे नाराज दिलीप कुमार ने उनसे संबंध तोड़ लिए थे। एक दिन दोपहर को अस्पताल से फोन आया कि अख्तर बहुत बीमार है और अपने भाई से मिलना चाहती है। फोन सायरा ने उठाया था। उसने दिलीप कुमार को सारी बातें बताईं और बहन से मिलने का अनुरोध किया। तबतक के आसिफ का भी निधन हो चुका था। दिलीप कुमार ने बहुत बेरुखी से मना कर दिया और कहा मेरे लिए अख्तर मर चुकी है। दो घंटे तक सायरा बानो दिलीप कुमार को मनाती रही और आखिरकार अपने साथ उनको लेकर अस्पताल पहुंची। भाई बहन को मिलवाया। बाद में अख्तर और सायरा अच्छी दोस्त बन गईं। सायरा बानो के व्यक्तित्व के इस पक्ष पर चर्चा कम होती है। वो जितनी ग्लैमरस और लोकप्रिय अभिनेत्री थीं उतनी ही सहज और पारिवारिक संबंधों को निभाने वाली महिला हैं। सायरा बानो ने दिलीप कुमार से न केवल टूटकर प्रेम किया बल्कि उनकी पत्नी होने की सभी जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया। आज वो एक सफल अभिनेत्री और बेहतर इंसान के तौर पर हिंदी फिल्म जगत में समादृत हैं।