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Saturday, June 25, 2022

सिनेमा पर आपातकाल का कहर

सिनेमा एक ऐसा माध्यम है जिसका भारतीय समाज पर जबरदस्त प्रभाव पड़ता है। सिने अभिनेता और अभिनेत्रियों की लोकप्रियता का कई बार राजनीति में उपयोग किया जाता है। कभी चुनाव जीतने के लिए तो कभी भीड़ जुटाने के लिए। दब देश में इमरजेंसी लगी थी और संजय गांधी खुद को इंदिरा गांधी के राजनीतिक वारिस के तौर पर स्थापित करने में लगे थे तब उन्होंने भी फिल्मी क
लाकारों की लोकप्रियता का सहारा लेने की कोशिश की थी। जब इंदिरा गांधी ने देश पर इमरजेंसी थोपी उस वक्त कांग्रेस पार्टी में इंदिरा इज इंडिया और इंडिया इज इंदिरा का नारा हकीकत हो चुका था। कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता घुटने टेक चुके थे। संजय गांधी का बोलबाला था। इमरजेंसी में हुई ज्यादतियों का सारा ठीकरा इंदिरा गांधी के सर फोड़ा जाता है और संजय गांधी की कारगुजारियों पर कम चर्चा होती है। इमरजेंसी के दौरान फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों पर जो पाबंदियां लगाई गईं उसके लिए संजय गांधी और उस दौर के उनके चमचे जिम्मेदार थे। इमरजेंसी के दौर में किशोर कुमार के गानों पर प्रतिबंध की खूब चर्चा होती है लेकिन देवानंद की फिल्मों और उनकी फिल्मों के गानों पर लगे प्रतिबंध के बारे में कम ही लोगों का पता है। देवानंद पर प्रतिबंध की वजह भी लगभग वही है जिसकी वजह से किशोर कुमार के गानों को प्रतिबंधित किया गया। 

देश में जब इमरजेंसी लगी थी तो हिंदी फिल्मों के ज्यादातर नायक और नायिकाएं उसके पक्ष में थे। बाद में उनमें से कइयों को कांग्रेस सरकार ने राज्यसभा में नामित करके पुरस्कृत भी किया। इनमें से एक अभिनेत्री तो वो भी हैं जो इन दिनों अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर और फासीवाद की आहट पर लगातार टिप्पणी करती हैं। ये अभिनेत्री इमरजेंसी के दौर में कांग्रेस के एक कार्यक्रम में नृत्य करने आई थीं और स्टेज पर परफार्म भी किया था। संजय गांधी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए काम भी किया था। दिलीप कुमार और नरगिस तो घोषित तौर पर कांग्रेस और संजय गांधी के पक्ष में थे और हिंदी फिल्मों के अन्य कलाकारों को उनके पक्ष में मोबलाइज भी कर रहे थे। देवानंद ने अपनी  आत्मकथा रोमांसिंग विद लाइफ में संजय गांधी के समर्थकों के बारे में लिखा है। उन्होंने लिखा है कि इमरजेंसी के दौर में युवा कांग्रेस की एक बेहद खूबसूरत और आकर्षक महिला बांबे (अब मुंबई) आई थी और उसने बालीवुड में संजय के पक्ष में समर्थन जुटाने का अभियान चलाया था। वो चाहती थी कि हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता और अभिनेत्री संजय गांधी की अगुवाई में दिल्ली में होनेवाली रैली में शामिल हों। देवानंद को भी उसने तैयार कर लिया। देवानंद जब दिल्ली की रैली में पहुंचे तो दिलीप कुमार वहां पहले से मंच पर मौजूद थे। देवानंद के मुताबिक उस रैली में संजय गांधी को नेता के तौर पर स्थापित करनेवाले भाषण हो रहे थे और नारे लग रहे थे। रैली खत्म होने के बाद देवानंद को कहा गया कि उनको दूरदर्शन के स्टूडियो जाकर युवा कांग्रेस और उसके नेता की प्रभावी नेतृत्व क्षमता के बारे में अपनी बात रिकार्ड करवानी है। देवानंद ने लिखा है कि ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उस वक्त की प्रोपगंडा मंशीनरी एकदम से फासीवादी तरीके से हर अवसर और हर व्यक्ति का उपयोग संजय गांधी की छवि चमकाने में लगी हुई थी। देवानंद को प्रोपगंडा मशीनरी का ये प्रस्ताव नहीं भाया और उन्होंने न सिर्फ दूरदर्शन जाने से मना कर दिया बल्कि इसका विरोध भी किया। उस दौर में कई अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने इमरजेंसी और संजय गांधी के पक्ष में बयान दिया था जो दूरदर्शन पर प्रसारित भी हुआ था। अगर दूरदर्शन के आर्काइव में वो सामग्री हो तो उसको निकालकर देश की जनता को बताना चाहिए कि कौन कौन से फिल्मी कलाकार इमरजेंसी के पक्ष में थे। खैर.. ये अवांतर प्रसंग है। 

देवानंद के मना करने की उस वक्त की सरकार में बेहद तीखी प्रतिक्रिया हुई। दूरदर्शन पर उनकी फिल्मों को तो बैन किया ही गया किसी भी सरकारी माध्यम में देवानंद का नाम नहीं आए ऐसी व्यवस्था बना दी गई। ये जानकर देवानंद को बहुत बुरा लगा था और उन्होंने उस वक्त के सूचना और प्रसारण मंत्री से इसकी शिकायत भी की थी लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। जब वो बांबे लौटे तो एक पार्टी मं उनको इस बात का एहसास हुआ कि उनके मना करने का कांग्रेस नेतृत्व ने कितना बुरा माना है। एक पार्टी में उनको अभिनेत्री नरगिस मिलीं और उनका हाथ पकड़कर एक कोने में ले गईं। वहां उन्होंने देवानंद से कहा कि आपने संजय गांधी के पक्ष में बोलने से मना कर अच्छा नहीं किया। उन्होंने देवानंद को दूरदर्शन पर जाने की सलाह भी दी। जब देवानंद ने उनको भी मना किया तो वो झल्ला गईं और बोली कि आप बेवजह हठ कर रहे हैं। आपको ये हठ छोड़ देना चाहिए। देवानंद नहीं माने और उन्होंने लिखा है कि उसके बाद वो संजय गांधी के चमचों और दरबारियों के निशाने पर आ गए थे। देवानंद की फिल्म देस परदेश रिलीज होनेवाली थी और उनको डर सता रहा था कि संजय गांधी के दरबारी उनकी फिल्म को नुकसान न पहुंचा दें। डर जायज भी था क्योंकि इमरजेंसी के दौर में जो भी संजय गांधी के विरोध में गया था उसको काफी परेशानियां झेलनी पड़ी थीं। फिल्मकारों को भी और कलाकारों को भी।   

Friday, March 24, 2017

सलमान का प्यार जिंदा है !

बहुत पुरानी कहावत है कि सच्चा प्यार कभी मरता नहीं है लेकिन फिल्मी प्यार को कई बार खत्म होते देखा गया है । बॉलीवुड की चमकती दमकती दुनिया में कोई चाहे किसी को भी कितना भी प्यार करे कई बार उसको खत्म होने में कोई वक्त नहीं लगता है । फिल्मी प्यार के पनपने, परवान चढ़ने और खत्म होते कई बार देखा गया है । फिल्मों के कई हीरोज़ ने कई बार अपने प्यार को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है तो बहुधा अपने दोस्तों से साझा किया है । अभी हाल ही में प्रकाशित अपनी आत्मकथा खुल्लम खुल्ला में ऋषि ने अपनी गर्लफ्रेंड यास्मीन से अपने संबधों के बारे में खुलकर लिखा है । ऋषि ने माना है कि एक फिल्म पत्रिका में उनके और डिंपल के बीच रोमांस की खबरों ने यास्मीन को उनसे अलग कर दिया यास्मीन के गम में वो कई दिनों तक डूबे रहे थे और एक दिन होटल में यास्मीन को देखकर शराब के नशे में हंगामा किया था जब होटल में उन्होने यास्मीन को एक दूसरे शख्स के साथ देखा तो उनके पीछे रेस्त्रां तक गए और उनसे दो टेबल दूर बैठकर शराब पीने लगे ऋषि ने एक शराब की बोतल यास्मीन के टेबल पर भिजवाया भी जिसे उसने ठुकरा दिया था तबतक ऋषि अपने दोस्तों के साथ अठारह हजार रुपए की शराब पी चुके थे । इसी किताब में ऋषि कपूर ने अपने पिता राज कपूर और नरगिस के बीच के प्यार को बेहद खूबसूरती से लिखा है - पापा और नरगिस के प्रेम संबंध के बारे में उनकी मां समेत सभी को जानकारी थी उनकी मां कृष्णा ने राज-नरगिस के इस अफेयर का बहुत विरोध आदि नहीं किया या इस विवाहेत्तर संबंध को लेकर घर में लड़ाई झगड़े की नौब नहीं आई थी पर जब नरगिस से राज कपूर का ब्रेकअप हुआ और वैजयंतीमाला से प्रेम संबंध बना तो कृष्णा अपने बच्चों के साथ राज कपूर का घर छोड़कर होटल में रहने चली गई थीं और बाद में अलग घर में रहने लगी थी राज कपूर ने तमाम कोशिशें की, मिन्नतें कीं लेकिन कृष्णा घर तभी लौटीं जब राज और वैजयंती के बीच ब्रेकअप हो गया इसी तरह से मीना कुमारी के धर्मेन्द्र से लेकर दिलीप कुमार तक से प्यार के किस्से आम हैं लेकिन प्यार शादी की दहलीज तक नहीं पहुंच सका था । ऐसा नहीं है कि बॉलीवुड के नायक-नायिकाओं के बीच पनपा प्यार अंजाम तक नहीं पहुंचता है । दिलीप कुमार सायरा बानो से लेकर काजोल-अजय देवगन और अभिषेक बच्चन- एश्वर्या तक के अफेयर शादी और सुखी वैवाहिक जीवन तक में बदले ।
मोहब्बत के इन तमाम अफसानों के बीच कई मशहूर किस्से सलमान खान के भी हैं  । सलमान खान को हर दौर में अलग हीरोइंस से प्यार हुआ, इकरार भी हुआ, अफेयर भी लंबे समय तक चला लेकिन उससे आगे कभी नहीं बढ़ सका । सलमान खान के तमाम अफेयर्स में से उनका कटरीना के साथ का अफेयर सबसे खास और लंबे समय तक चला । जब भी सलमान खान से किसी भी प्रेस कांफ्रेंस में कटरीना के बारे में पूछा जाता है तो उनके चेहरे पर एक खास किस्म की चमक दिखाई देती है जिसमें प्यार की गर्मी को अंडरलाइन किया जा सकता है । ऐश्वर्या राय से ब्रेकअप के बाद सलमान खान की जिंदगी में कटरीना कैफ आईं और फिर दोनों ने एक दूसरे में सुकून ढूंढ लिया । दोनों ने एक के बाद एक कई सफल फिल्में की । दोनों के बीच ऑनस्क्रीन और ऑफस्क्रीन केमिस्ट्री जबरदस्त रही थी । लेकिन सलमान खान की ये प्रेमिका भी उनके साथ ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी । दोनों के ब्रेकअप की खबरें भी आने लगी थी लेकिन इस संबंध के टूटने की मुनादी कर दी समुद्र तट पर छुट्टियां मना रही कटरीना और रणवीर कपूर की तस्वीरों ने । बिकिनी में कटरीना और छुट्टी के मूड में दिख रहे रणवीर की इन तस्वीरों ने उस वक्त खूब सुर्खियां बटोरी थी । रणवीर और कटरीना के संबंधों को करीना कपूर ने एक इंटरव्यू में स्वीकार भी कर लिया था । लेकिन रणवीर कटरीना का रोमांस या अफेयर ज्यादा दिन नहीं चल पाया । उस दौर में सलमान खान ने कटरीना से चुटकी भी ली थी और दोनों में दूरियां साफ तौर पर दिखती थी । कटरीना, सलमान खान के साथ दिखना नहीं चाहती थीं और ना ही सलमान के बारे में किसी तरह की टिप्पणी करती थी ।

अब जब सलमान खान एक बार फिर से कटरीना के साथ टाइगर जिंदा है में काम कर रहे हैं तो कहा जा रहा है कि दोनों के बीच का प्रेम एक बार फिर से फूट पड़ा है । लगभग पांच साल के बाद दोनों एक साथ किसी फिल्म में आ रहे हैं और इन दिनों टाइगर जिंदा है कि शूटिंग के लिए ऑस्ट्रिया में हैं । टाइगर जिंदा है के सेट से जब कटरीना ने अपनी फोटो शेयर की थी तब उनके फैंस निराश हो गए थे क्योंकि फ्रेम में सलमान भाई नहीं थे । ट्विटर से लेकर फेसबुक पर सलमान के फैंस ने भी निराशा जाहिर की थी । इस पर अभी बातें हो ही रही थी कि सलमान खान ने कटरीना के साथ अपनी एक पिक्चर ट्वीट कर दी । फोटो में दोनों के बीच केमिस्ट्री बेहतरीन लग रही है लेकिन उससे भी अहम है ट्विट पर सलमान की टिप्पणी । फोटो के साथ सलमान ने लिखा – बैक टुगेदर, इन टाइगर जिंदा है । इस टिप्पणी में बैक टुगेदर को डिकोड करने की जरूरत है । अभी चंद दिनों पहले कटरीना कैफ से एक इंटरव्यू में पूछा गया था कि बॉलीवुड में कौन उनको परिवार की तरह महसूस करवाता है तो उन्होंने बगैर वक्त गंवाए कहा था सलमान खान । इसके पहले भी जब वो बिग बॉस के सेट पर अपनी फिल्म फितूर के प्रमोशन के लिए पहुंची थी तब भी सलमान और उनके बीच के संवाद का अंदाज कुछ अलग कहानी बयां कर रहा था । तो क्या मान लिया जाए कि पांच साल पहले जिस प्यार की डोर टूट सी गई थी वो ऑस्ट्रिया के खूबसूरत लोकेशन पर एक बार फिर से जुड़ने लगी है । इस प्यार की डोर को इस वजह से भी जुड़ता देखा जा रहा है क्योंकि सलमान की गर्लफ्रेंड लूलिया वेंतूर कटरीना की वजह से ही ऑस्ट्रिया नहीं जा पा रही है । टाइगर जिंदा है की शूटिंग खत्म होते होते प्यार के फूल भी पूरी तरह से खिल चुके होंगे । 

Saturday, February 18, 2017

खुल्लम-खुल्ला से खुलते राज

हाल के दिनों में अपने चंद ट्वीट्स को लेकर खासे चर्चा में आए ऋषि कपूर की आत्मकथा जब बाजार में आई तो उसके नाम को लेकर भी लेकर एक उत्सकुकता का वातावरण बना । पत्रकार मीना अय्यर के साथ मिलकर उन्होंने अपनी जिंदगी के कई पन्नों को खोला । अपने पिता और खुद की प्रेमिकाओं के बारे में खुल कर लिखा है । यह किताब शास्त्रीय आत्मकथा से थोड़ा हटकर है क्योंकि इसमें हर वाकए पर ऋषि कपूर कमेंटेटर की तरह अपनी राय भी देते चलते हैं । ऋषि कपूर  ने साफ लिखा है कि जब उनके पापा का नरगिस जी से अफेयर चल रहा था तब घर में सबको मालूम था लेकिन उसकी मां कृष्णा ने बहुत विरोध आदि नहीं किया या इस विवाहेत्तर संबंध को लेकर घर में लड़ाई झगड़ा नहीं हुआ । जब राज कपूर का वैजयंतीमाला से प्रेम संबंध बना तो कृष्णा अपने बच्चों के साथ राज कपूर का घर छोड़कर होटल में रहने चली गई थीं और बाद में अलग घर में । राज कपूर ने तमाम कोशिशें की लेकिन कृष्णा घर तभी लौटीं जब राज और वैजयंती के बीच ब्रेकअप हो गया । इस पूरे प्रसंग को बताते हिए ऋषि इस बात पर हैरानी भी जताते हैं कि वैजयंती माला ने चंद साल पहले एक इंटरव्यू में अरने प्रेम संबंध से इंकार कर दिया था और कहा था कि राज कपूर ने पब्लिसिटी के लिए ये कहानी गढ़ी थी । ऋषि साफ तौर पर कहते हैं कि वैजयंतीमाला को तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश नहीं करना चाहिए वो भी तब जब राज कपूर अपने बचाव के लिए नहीं हैं ।
इसी तरह से ऋषि ने अपनी गर्लफ्रेंड यास्मीन से अपने संबधों के बारे में बताया है । ऋषि ने माना है कि एक फिल्म पत्रिका में उनके और डिंपल के बीच रोमांस की खबरों ने यास्मीन को उनसे अलग कर दिया । यास्मीन के गम में वो कई दिनों तक डूबे रहे थे और एक दिन होटल में यास्मीन को देखकर शराब के नशे में हंगामा किया था । जबकि उन्होंने साफ तौर पर माना है कि डिंपल से उनको कभी प्यार हुआ ही नहीं था । हलांकि कई सालों के बाद उन्होंने डिंपल के साथ फिर से सागर फिल्म में काम किया था तो उस दौर में नीतू सिंह भी दोनों के बीच के रिश्ते को लेकर सशंकित हो गई थी ।
ऐसा नहीं है कि इस किताब में सिर्फ प्यार मोहब्बत के किस्से ही हैं । इस में ऋषि कपूर ने अपनी असफलता के दौर पर भी लिखा है और माना है कि उस दौर में वो अपनी असफलता के लिए नीतू सिंह को जिम्मेदार मानने लगे थे इस वजह से पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव आ गया था । लेकिन इस किताब का सबसे मार्मिक प्रसंग है जब राज कपूर अपने अंतिम दिनों में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती थे तो दिलीप कुमार उनसे मिलने आए थे । अस्पताल में बेसुध पड़े राज कपूर के हाथ को पकड़कर दिलीप कुमार ने कहा था- राज, अब उठ जा । तू हमेशा से हर सीन में छाते रहे हो, इस वक्त भी सारे हेडलाइंस तेरे पर ही है । राज आंखे खोल, मैं अभी पेशावर से आया हूं और वहां से कबाब लेकर आया हूं जो हमलोग बचपन में खाया करते थे । दिलीप कुमार बीस मिनट तक ऐसी बातें करते रहे थे । ऋषि ने बताया कि दोनों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा रहती थी लेकिन दोनों बेहतरीन दोस्त थे । खुल्लम-खुल्ला में ऋषि ने सचमुच दिल खोल दिया है ।