फिल्म और टेलीविजन संस्थान पुणे ने हाल में फेसबुक पर एक पोस्ट डाली। इसमें बताया कि बिहार सरकार के कला और संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने संस्थान का दौरा किया। सचिव ने फिल्म और टेलीविजन संस्थान के शार्टटर्म कोर्स और आउटरीच कार्यक्रम के बारे में समझा। संस्थान इस तरह के कोर्स और कार्यक्रम देश के अलग अलग हिस्से में चलाता है। इस संभावना को भी टटोला गया कि क्या ये कोर्स बिहार में भी चलाए जा सकते हैं ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को लाभ मिले। राज्य में फिल्म शिक्षा को बेहतर किया जा सके। इस पोस्ट को देखते हुए बिहार विधानसभा चुनाव के पहले तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की एक पोस्ट की याद आई। उसमें लिखा गया था, बिहार फिल्म एवं नाट्य संस्थान की स्थापना को मिली स्वीकृति। बताया गया था कि कैबिनेट बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय से बिहार की कला और संस्कृति को नई उड़ान मिलेगी। फिल्म इंडस्ट्री को प्रस्तावित संस्थान नई पहचान देगा। थिएटर और नाट्यकला के कलाकारों के लिए प्रशिक्षण केंद्र होगा और स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का सेतु बनेगा। कुछ इसी तरह का पोस्ट तत्कालीन उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी डाला था। उन्होंने लिखा था कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) की तर्ज पर राज्य में बिहार नाट्य विद्यालय बनेगा। विजय कुमार सिन्हा ने लिखा था कि विद्यालय निर्माण की प्रक्रिया के लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा। छात्र राज्य में नाट्य विधा से जुड़ी पढ़ाई और प्रशिक्षण ले सकेंगे। संस्थान में स्नातक स्तर पर डिग्री और दो वर्षीय डिप्लोमा प्रदान किया जाएगा और यह विद्यालय राज्य के कला के क्षेत्र में कार्य करेगा।
बिहार विधान सभा चुनाव संपन्न हो गए। पहले जनता दल (यू) के नीतीश कुमार और अब भारतीय जनता पार्टी के सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बने । मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया। अब अपेक्षा है कि सम्राट चौधरी चुनाव पूर्व दी गई जानकारी के बारे में ठोस पहल करें। संभव है बिहार के कला संस्कृति विभाग के सचिव का फिल्म और टेलीविजन संस्थान, पुणे का दौरा इस संबंध में ही रहा हो। आज बिहार में एक फिल्म और टेलीविजन के लिए अभिनय समेत विभिन्न विधाओं को सिखानेवाले एक संस्थान की बहुत आवश्यकता है। बिहार में रंगमंच की परंपरा रही है। मनोज वाजपेयी, पंकज त्रिपाठी तो जाना पहचाना नाम हैं। इसके अलावा बिहार से अखिलेन्द्र मिश्रा, विजय कुमार जैसे उत्कृष्ट कलाकारों ने रंगमंच और फिल्म दोनों में अपनी जगह बनाई। अमिताभ सिन्हा ने लेखन और निर्देशन में नाम कमाया है। वो बिहार के हैं और फिल्म और टेलीविजन सस्थान, पुणे के छात्र रह चुके हैं। इनके अलावा भी बिहार का रंगमंच काफी समृद्ध रहा है। बावदूद इसके बिहार में ना तो कोई सरकारी नाट्य विद्यालय है और ना ही कोई फिल्म और टेलीविजन से जुड़ा संस्थान। बिहार में प्रतिवर्ष सैकड़ों छात्र अभिनय को अपना करियर बनाना चाहते हैं। कोई संस्थान नहीं होने के कारण उनको दिल्ली, मुंबई या देस के किसी और राज्य की ओर रुख करना होता है। कई ऐसे प्रतिभाशाली छात्र हैं जो नाट्य कला या सिनेमा निर्माण से जुड़ना चाहते हैं लेकिन अवसर नहीं होने के कारण उनकी प्रतिभा का उपयोग नहीं हो पाता है। निजी संस्थानों की फीस इतनी अधिक होती है कि सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार के छात्रों के लिए वहां जाना संभव नहीं हो पाता। स्वाधीनता के इतने वर्षों बाद भी बिहार में इस तरह के किसी संस्थान के नहीं होने से यहां के राजनीतिक नेतृत्व पर प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है। स्वाधीनता के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में पहली बार बिहार में सरकार बनी है। अब अवसर है कि इस भूल को सुधारा जाए। बिहार में एक नाट्य कला विद्यालय या फिल्म इंस्टीट्यूट की स्थापना करके यहां के छात्रों के सपने को पूरा किया जाए।
पिछले दिनों बिहार से खबर आई थी कि राज्य सरकार फिल्मसिटी का निर्माण करना चाहती है। मुंबई से सिनेमा से जुड़े कुछ लोगों के साथ अधिकारियों ने बांका इलाके में फिल्मसिटी निर्माण की संभावनाओं पर विचार करने के लिए दौरा किया था। इस बात को कई महीने बीत गए लेकिन अबतक ये ज्ञात नहीं हो सका है कि फिल्मसिटी के निर्माण की योजना का क्या हुआ। अगर बिहार में फिल्मसिटी का निर्माण करके उसको सफल और क्रियाशील बनाना है तो बिहार में फिल्म निर्माण से जुड़े मानव संसाधन तैयार करने पर भी विचार करना होगा। इसके लिए आवश्यक है कि बिहार में राज्य का अपना एक फिल्म इंस्टीट्यूट हो। इस फिल्म इंस्टीट्यूट में सिर्फ अभिनय का प्रशिक्षण नहीं दिया जाए बल्कि तकनीकी में भी छात्रों को प्रशिक्षित किया जाए चाहे वो साउंड रिकार्डिंग हो. डबिंग हो या फिर वीएफएक्स जैसी विधा हो। बिहार सरकार चाहो तो केंद्र सरकार से अनुरोध करके फिल्म एंड टेलीविजन संस्थान, पुणे या सत्यजित राय फिल्म और टेलीविजन संस्थान, कोलकाता का एक केंद्र पटना या बिहार के किसी अन्य शहर में खोल सकती है। दोनों संस्थानों को अब विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है लिहाजा उनको कहीं भी केंद्र खोलने में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होगी। बिहार सरकार को आधिकारिक रूप से सूचना और प्रसारण मंत्रालय को अनुरोध भेजना होगा। सूचना और प्रसार मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के साथ समन्वय करके इस कार्य को पूरा किया जा सकता है। आवश्यकता राजनीतिक इच्छा शक्ति और प्रयास की है। डबल इंजन की सरकार का इतना लाभ तो बिहार को मिलना ही चाहिए।
बीते शुक्रवार को सुवेंदु अधिकारी को जब बीजेपी के बंगाल विधानमंडल दल का नेता चुना गया था तो गृह मंत्री अमित शाह ने वहां उपस्थित विधायकों को संबोधित किया था। अपने संबोधन में अमित शाह ने बंगाल में एक विश्वस्तरीय नाट्य और कला विद्यालय की स्थापना की बात की थी। बंगाल में अगर विश्वस्तरीय नाट्य कला विद्यालय बनाया जाता है तो अच्छी बात होगी लेकिन ध्यान में रहना चाहिए कि वहां तो पहले से ही सत्यजित राय फिल्म और टेलीविजन संस्थान है। नया संस्थान बनाने से बेहतर है कि इस संस्थान को ही संसाधानयुक्त करके, नियुक्तियां आदि करके इसको विश्वस्तरीय बनाया जाए। जबकि बिहार में तो ऐसा कोई संस्थान है भी नहीं। सुवेंदु की तरह सम्राट चौधरी भी गृहमंत्री अमित शाह की पसंद बताए जाते हैं। बंगाल की तरह बिहार चुनाव के समय भी अमित शाह ने कमान संभाली थी। मंत्रिमंडल विस्तार के पहले उनके पटना पहुंचने से स्पष्ट है कि उनकी नजर बिहार पर भी है। गृहमंत्री ने जिस तरह से बंगाल को नाट्य विद्यालय देने की घोषणा की उसी तरह उनका ध्यान बिहार पर भी जाए, ऐसी अपेक्षा बिहार के लोग कर रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को विधानसभा चुनाव पूर्व के कैबिनेट के उक्त निर्णय पर ध्यान देना चाहिए। प्रस्ताव को पुनर्जीवित करते हुए सरकार की ओर से केंद्र सरकार को अनुरोध भेजना चाहिए। इसमें कोई समस्या है तो बिहार को मध्य प्रदेश की तर्ज पर अपना नाट्य विद्यालय खोलना चाहिए। बिहार में प्रतिभा की कमी नहीं है, कमी है तो बेहतर अवसर की। अगर राज्य में ही छात्रों को अवसर मिलता है तो ये बदलाव के एक बड़े कदम के तौर पर रेखांकित हो सकता है।

No comments:
Post a Comment