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Sunday, February 23, 2014

पुस्तक मेले में युवा लेखकों की धूम

पिछले नौ दिनों से जारी दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का आज आखिरी दिन है। दिल्ली का विश्व पुस्तक मेला जर्मनी के फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेला और लंदन बुक फेयर के बाद सबसे ज्यादा प्रतिष्ठित माना जाता है । दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में देश के कोने कोने से लेखकों का जत्था पहुंचता है । किताबों के इस महाकुंभ में लेखकों के साथ साथ पाठकों की भी भागीदारी होती है । विश्व में पुस्तक मेलों का एक लंबा इतिहास रहा है। पुस्तक मेलों की पाठकों की रुचि बढ़ाने से लेकर समाज में पुस्तक संस्कृति को बनाने और उसको विकसित करने में एक अहम योगदान रहा है ।  भारत में बड़े स्तर पर पुस्तक मेले सत्तर के दशक में लगने शुरू हुए । दिल्ली और कोलकाता में पुस्तक मेला शुरू हुआ । 1972 में भारत में पहले विश्व पुस्तक मेले का दिल्ली में आयोजन हुआ । उसके बाद से हर दूसरे साल दिल्ली के प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेले का आयोजन किया जाता था । दो हजार बारह में जब एम ए सिकंदर ने नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक का पद संभाला तो इस हर साल आयोजित करने का ऐलान किया । अगले साल से यह पुस्तक मेला अब प्रतिवर्ष आयोजित हो रहा है । इस बार का पुस्तक मेला पहले के आयोजनों से कई मायनों में अलग और व्यवस्थित है । पाठकों से लेखकों के संवाद से लेकर हिंदी महोत्सव तक आयोजित हुए जिसमें लेखक पाठक संवाद सुकून से संभव हुआ । इस बार लोकार्पण को लेकर भी मारामारी नहीं हुई क्योंकि उसके लिए भी व्यवस्था थी । कुल मिलाकर कह सकते हैं कि विश्व पुस्तक मेला इंतजाम के लिहाज से विश्वस्तरीय होने की राह पर चल पड़ा है ।

इस वर्ष का विश्व पुस्तक मेला कई लिहाज से उल्लेखनीय रहा । इस बार हिंदी के कई युवा लेखकों की कृतियां सामने आई । हिंदी के कई प्रकाशकों ने इस बार इन युवा लेखकों की कृतियों को प्रचारित भी किया । इस बात पर हिंदी में बहुधा गंभीर चिंता जताई जाती है कि साहित्य से हिंदी का युवा पाठक दूर होता जा रहा है । विश्व पुस्तक मेले में युवा पाठकों की भागीदारी ने इस चिंता को कुछ हद तक दूर किया । युवा लेखकों की भारी संख्या में प्रकाशित कृतियों को हिंदी के प्रकाशकों ने पहले के मुकाबले बेहतर तरीके से प्रचारित और प्रदर्शित कर नए पाठकों से उनका परिचय करवाने का प्रत्न भी किया । भारतीय ज्ञावपीठ ने पुस्तक मेले के दौरान ही युवा पुरस्कार दिया और पुरस्कृत लेखक की किताब भी जारी की । कहानी के लिए आठवां ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार पत्रकार योगिता यादव को दिया गया और योगिता का पहला कहानी संग्रह क्लीन चिट भी ज्ञानपीठ प्रकाशन से छपकर विमोचित हुआ । कविता के लिए यही पुरस्कार अरुणाभ सौरभ को उनके काव्य संग्रह दिन बनने के क्रम में को दिया गया । इस मौके पर एक और नए लेखक आशुतोष का कहानी संग्रह मरें तो उम्र भर के लिए भी विमोचित किया है । इस मौके पर बोलते हुए वरिष्ठ लेखकों और आलोचकों का मानना था कि इन युवा लेखकों ने अपनी रचनाओं से एक उम्मीद जगाई है । ज्ञानपीठ के अलावा आधार प्रकाशन, पंचकूला ने भी विश्व पुस्तक मेले में कई युवा लेखक लेखिकाओं की किताबें प्रकाशित की । आधार प्रकाशन से प्रकाशित नई किताबों में मशहूर लेखिका जयश्री राय का नया उपन्यास- इकबाल भी है । कश्मीर की पृष्ठभूमि पर लिखा गया एक यह उपन्यास अपनी भाषा और शैली के जरिए हिंदी साहित्य में एक ताजा हवा के झोंके की तरह से आता है । जिया और इकबाल के प्रेम संबंधों में एक अजीब तरह की कशमकश और छटपटाहट है । जयश्री राय के अलावा आधार प्रकाशन से ही कहानीकार अल्पना मिश्रा का नया उपन्यास-अन्हियारे तलछट में चमका, कविता का उपन्यास- ये दिये रात की जरूरत थे, वंदना शुक्ल की मगहर की सुबह, विमलचंद पांडे का उपन्यास भी प्रकाशित हुआ । इसके अलावा कहानीकार ज्योति चावला के कहानी संग्रह-अंधेरे की कोई शक्ल नहीं होती की भी पुस्तक मेले में खासी चर्चा रही । पुस्तक मेले में सामयिक प्रकाशन ने भी कई युवा लेखकों की किताबें जारी की । इसमें पूर्व पत्रकार और कवयित्री वर्तिका नंदा की किताब- खबर यहां भी.. के अलावा कहानीकार विवेक मिश्र का कहानी संग्रह-पार उतरना धीरे से और निर्मला भुराड़िया की किताब-गुलाम मंडी भी जारी हुई । गुलाम मंडी में निर्मला भुराड़िया ने देह व्यापार को केंद्र में रखा है । सामयिक प्रकाशन से ही चर्चित लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ का उपन्यास पंचकन्या भी जारी किया गया । कहानी संग्रहों और उपन्यासों के कोलाहल के बीच हरियाणा की युवा लेखिका निर्मल सिंह की एक किताब हरियाणा के लोकगीतों पर वाणी प्रकाशन से छपी है । निर्मल ने हरियाणा के सोलह जिलों में तीन सौ लोगों से बातचीत करने के बाद ये किताब तैयार की है । किताबों की इस फेहरिश्त के बीच ये बात भी रेखांकित करने योग्य है कि इन किताबों का प्रोडक्शन भी काफी अच्छा है । उम्मीद की जा सकती है कि आनेवाले दिनों में इन युवा लेखकों की किताबों पर हिंदी में गंभीर चर्चा होगी । दिल्ली के इस पुस्तक मेले में इतनी संख्या में युवा लेखकों की किताबों का प्रकाशन आश्वस्तिकारक है जरूरत इस बात की है कि प्रकाशन इन किताबों को पाठकों तक पहुंचाने का यत्न करें । 

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