राज कपूर के बारे में कई बातें कही जाती हैं। एक तो उनको सफेद साड़ी पहनने वाली स्त्रियां पसंद थीं। या उनको पसंद करनेवाली स्त्रियां सफेद साड़ी पहनती थीं। दूसरी उनकी वो फिल्में जबरदस्त हिट होती थीं जिनकी लीड हीरोइन के साथ उनके अफेयर के चर्चे होते थे। नरगिस से लेकर पद्मिनी और वैजयंतीमाला तक का उदाहरण उनके साथ काम करनेवाले अबतक देते रहते हैं। उनपर लिखी कई पुस्तकों में भी इस तरह की बातों का उल्लेख मिलता है। एक और बात राज कपूर के बारे में कही जाती है, जब से नरगिस और उनका अलगाव हुआ तब से उनकी फिल्मों में सेंसुअलिटी का स्थान सेक्सुअलिटी ने ले लिया। इस बीच एक और घटना घटी जिसने राज कपूर को नायिकाओं को पेश करने का आयडिया दे दिया। एक दिन राज कपूर मुंबई (तब बांबे) में अपने किसी मित्र के यहां रात के खाने पर गए थे। मित्र के घर जब वो खाना खा रहे थे डायनिंग टेबल के ऊपर लगी तस्वीर देखकर वो खाना भूल गए। वो राजजा रवि वर्मा की एक पेंटिंग थी। पेंटिंग में एक स्त्री भीगी हुई साड़ी में थी। गीली और झीनी साड़ी अपने बदन पर लपेटी। उस स्त्री की पेंटिंग में सेंसुअलिटी थी, जिसे राज कपूर ने पर्दे पर सेक्सुअलिटी में बदल दिया। ये वही दौर था जब राज कपूर की जिंदगी से नरगिस जा चुकी थीं। उनकी नई नायिका थीं पद्मिनी। उनको लेकर राज कपूर फिल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ बना रहे थे। इस फिल्म में पद्मिनी पर फिल्माए गए गीत ‘ओ मैंने प्यार किया ओहो क्या जुर्म किया’ में राज कपूर ने राजा रवि वर्मा की पेंटिंग को दृष्यों में उतारने का प्रयास किया। गाने के दौरान पद्मिनी काली साड़ी पहनकर झरने के नीचे बने जलकुंड में कूदती हैं। तैरती हैं। पानी से बाहर आकर चट्टान पर लेटती हैं। पलटती हैं। इन सारी मादक अदाओं को कैमरा कैद करता रहता है। पद्मिनी ने इस पूरे सीन में काली साड़ी पहनी थी जो उसके शरीर के साथ चिपकी रहती है। झरने में नहाने का छोटा सीन भी है। जिसको राज कपूर दिखाते तो हैं लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि वो अगली फिल्म के लिए कुछ बचा लेना चाहते हैं।
राज कपूर ने फिल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ में जो बचा लिया था उसको उन्होंने दिखाया अपनी फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में। इस फिल्म का गाना याद करिए ‘अंग लग जा बालमा’। इस गाने के बोल शुरु होने से पहले लगभग एक मिनट तक नायिका अपने कमरे में बेचैनी में करवटें बदलती हैं। कैमरा विभिन्न मुद्राओं को कैद करता है। डेढ मिनट बाद जब कड़कती हुई बिजली और तूफानी रात में नायिका पद्मिनी पेड़ के तने से लिपट कर गाना आरंभ करती है तो दर्शक नायिका की अदाओं में खो जाते हैं। यहां राज कपूर अपनी नायिका को काली साड़ी से हल्के क्रीम कलर और लाल बार्डर वाली साड़ी तक लेकर आते हैं और उसको भिगाते भी हैं। चौखट पर अपने बदन पर साड़ी लपेटकर खड़ी पद्मिनी राजा रवि वर्मा की पेंटिंग को साकार कर देती हैं। पर इस फिल्म में भी ऐसा लगता है कि राज कपूर ने यहां भी कुछ बचा लिया। इस फिल्म के करीब डेढ़ दशक बाद राज कपूर की एक फिल्म आती है ‘राम तेरी गंगा मैली’। ये फिल्म राज कपूर ने अपने बेटे राजीव कपूर को लेकर बनाई थी। इस फिल्म का गाना याद करिए, तुझे बलाए मेरी बाहें। इसमें लाल वस्त्र में नायिका आती है लेकिन उसके बाद जब वो पर्वत के नीचे और झरने के पीछे अपने होने की बात करती है तो सफेद पारदर्शी साड़ी पहने होती है और यहां आकर राज कपूर लगभग नग्नता तक चले जाते हैं। मंदाकिनी पर फिल्माए इस दृष्य को लेकर उस समय काफी बवाल मचा था। सेंसर से सर्टिफिकेट मिलने के बाद ये फिल्म जबरदस्त हिट रही थी। उस वर्ष की सबसे बड़ी हिट फिल्म। इस फिल्म ने रातों रात मंदाकिनी को स्टार बना दिया। उसके बाद मंदाकिनी ने दर्जनों फिल्में की जिनमें मिथुन चक्रवर्ती और गोविंदा के साथ की गई फिल्में ठीक ठाक चली। मेरठ की रहने वाली यास्मीन जोसेफ को राज कपूर ने देखा। कहा जाता है कि हिंदी फिल्मों की नायिकाएं राज कपूर की नीली आंखों में खो जाती थीं लेकिन राज कपूर यास्मीन जोसेफ की नीली आंखों में खोए नहीं बल्कि डूब गए। सीधे अपनी फिल्म का लीड रोल दे दिया। मंदाकिनी नाम भी दिया। मेरठ की यास्मीन जोसेफ मंदाकिनी बनकर प्रसिद्ध हो गई। मंदाकिनी फिर प्रसिद्धि से गुमनामी में गई और कुछ दिनों बाद पता चला कि उन्होंने एक बौद्ध मतावलंबी से शादी कर ली और अब फिल्मी दुनिया से दूर अपना पारिवारिक जीवन जी रही हैं।
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