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Saturday, January 24, 2026

नागिन का प्यार


नाग-नागिन की कहानियां हमारे समाज को गहरे तक आकर्षित करती है। गांवों में जब संपेरे टोकरी में सांप लेकर पहुंचते हैं और किसी सार्वजनिक स्थान पर बीन बजाकर सांप को उसकी धुन पर नचाते हैं तो देखनेवालों की भीड़ जमा हो जाती थी। नाग-नागिन की प्रेम कहानी और नागमणि को लेकर भी तरह तरह की कहानियां समाज जीवन में सुनी और कही जाती रही हैं। इच्छाधारी नागिन का नाग के प्रति समर्पण की कथा लोग चाव से सुनते हैं। इतिहासकार ए एल बैशम ने अपनी पुस्तक वंडर दैट वाज इंडिया में भी इंडिया इज अ कंट्री आफ स्नेक चार्मर्स (भारत संपेरों का देश है) लिखे। बैशम की इस पुस्तक को अब भी भारतीय अकादमिक जगत में खासी प्रतिष्ठा प्राप्त है। इतना ही नहीं एक तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर चलती रहती है जिसमें जवाहरलाल नेहरू अपने विदेशी मेहमान, संभवत: जैकलीन कैनेडी को, संपेरे की कला दिखाते नजर आते हैं। इस पृष्ठभूमि का फिल्मकारों ने भी खूब फायदा उठाया। आज से 50 वर्ष पूर्व एक फिल्म आई नागिन। 1976 में प्रदर्शित और राजकुमार कोहली निर्देशित इस फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। इतना ही नहीं तब से लेकर आजतक जिसने भी जिस फार्मेट में नाग-नागिन की कहानी को बेहतर ट्रीटमेंट के साथ दिखाया उसको दर्शकों ने पसंद किया। 

मल्टीस्टारर फिल्म नागिन के बाद अभिनेत्री रीना राय की गिनती हिंदी फिल्मों की शीर्ष अभिनेत्री में होने लगी। रीना राय के पहले निर्माता निर्देशक इस भूमिका के लिए सायरा बानो को लेना चाहते थे लेकिन नकारात्मक किरदार होने के कारण सायरा तैयार नहीं हुईं। इस फिल्म में इच्छाधारी नाग की भूमिका में जितेन्द्र हैं। उनके साथ सुनील दत्त, फिरोज खान, कबीर बेदी, योगिता बाली, रेखा जैसी कई कलाकारों से सज्जित इस फिल्म का आरंभ बेहद रोचक तरीके से होता है। मानवरूपी इच्छाधारी नाग जितेन्द्र पर गरुड़ आक्रमण करते हैं। ठीक उसी समय सुनील दत्त उसकी जान बचाता है। सुनील दत्त इचछधारी नाग-नागिन पर पुस्तक लिखने की चाहत की बात जितेन्द्र से करता है। वहां फिर वही कहानी दोहराई जाती है कि अमावस की रात को नागिन अपने नाग से मिलने आती है। नाग अपनी मणि को निकाल कर रख देता है। मणि की आभा में नागिन मस्त होकर नाचती है। इस बीच सुनील दत्त के एक दोस्त ने नाग को गोली मार दी। नाग मर जाता है। फिर एक कहानी। सभी दोस्त आपस में बात करते हैं कि जल्दी से मृत नाग को खोजकर जमीन में गाड़ देना चाहिए नहीं तो उसकी आंख में नागिन हत्यारों की तस्वीर देख लेगी। पर ऐसा हो नहीं पाता है और मृत नाग की आंखों में नागिन को हत्यारे और उसके दोस्तों की तस्वीर नजर आती है। नागिन रूपी रीना राय हत्यारों को चुन चुन कर मारना आरंभ कर देती है। रीना राय की बड़ी बड़ी आंखें और आंखों का रंग दर्शकों को मोहित करता है। रीना राय जब एक एक करके किरदारों की हत्या करती है तो दर्शकों को थ्रिलर का आनंद मिलता है। एक दिन सुनील दत्त को इच्छधारी नागिन का राज पता चल जाता है। प्रेमनाथ के रूप में एक साधु की एंट्री होती है जो कहता है कि इंसान बदला लेना भूल सकता है पर नागिन नहीं। ये संवाद भी काफी लोकप्रिय हुआ था। निर्देशक ने पूरी कहानी को इस तरह से बुना कि समाज में व्याप्त नाग-नागिन को दर्शक जब पर्दे पर देखता है तो वो कहानी के बहाव में बहता चला जाता है। प्रेमनाथ ने साधु के रूप में बेहद शानदार अभिनय किया और नागिन को वश में करने के उसके प्रयासों को देखते हुए दर्शकों को नागिन से सहानुभूति होती है। बहुत कम फिल्मों में ऐसा होता है कि नकारात्मक भूमिका के साथ दर्शकों की सहानुभूति होती है। 

फिल्म में रोचक मोड़ तब आता है जब सुनील दत्त अपना ताबीज साधु को वापस करता है और कहता है कि उसने नागिन को मार दिया है। इस संवाद के बाद जब साधु पूजा कर रहा होता है तो अचानक रीना राय वहां दिखती है। आश्चर्यचकित होकर प्रेमनाथ कहते हैं कि तुम मरकर कैसे जिंदा हो गई। रीना राय का साधु को दिया गया उत्तर भई उस समय खूब चर्चित हुआ था, नागिन के इंतकाम की ज्वाला को कोई ताबीज शांत नहीं कर सकता। संवाद के अलावा इस फिल्म के गीत भी बेहद लोकप्रिय हुए थे। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत में लता मंगेशकर और महेन्द्र कपूर का गाया गीत तेरे संग प्यार मैं नहीं तोड़ना लोगों की जुबां पर चढ़ गया था। कहना ना होगा कि जिस प्रकार का ट्रेंड इस फिल्म ने सेट किया था उसपर आगे चलकर श्रीदेवी और ऋषि कपूर अभिनीत फिल्म नगीना बनी। श्रीदेवी ने अपनी आंखों के मूवमेंट से नागिन के किरदार को जीवंत कर दिया था। फिल्में को कई बनीं। इतना ही नहीं एकता कपूर ने नागिन नाम से ही एक सीरियल बनाया जिसके सात सीजन आ गए हैं। नागिन टीवी सीरियल ने अपने जानर में सफलता के नए कीर्तिमान गढ़े। और तो और नागराज के नाम एक कामिक्स भी बाजार में आया था जिसको भी खूब पसंद किया गया था।   


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