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Wednesday, October 14, 2026

दिल्लगी ने दी हवा


गोवा में आयोजित होनेवाले भारतीय अंतराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में कुछ वर्षों पूर्व एक सत्र के दौरान करण जौहर ने कहा था कि पहले फिल्मों में दो-तीन प्रकार की कहानियां ही दर्शकों को पसंद आती थीं। अगर मुझे ठीक याद आ रहा है तो करण ने कहा था कि एक तो खोया पाया का फार्मूला और दूसरा प्रेम त्रिकोण वाली कहानी को दर्शक खूब पसंद करते हैं। करण जौहर के उस वक्तव्य के बाद वहां उपस्थित फिल्म इतिहासकारों से इसपर चर्चा भी हुई थी। उस चर्चा में फिल्म दोस्ताना नहीं आई थी। फिल्म दोस्ताना करण जौहर के पिता यश जौहर की फिल्म है। इस फिल्म की कहनी भी प्रेम त्रिकोण ही है। विजय (अमिताभ बच्चन) और रवि (शत्रुघ्न सिन्हा) दो दोस्त हैं जिनको शीतल (जीनत अमान) से प्यार हो जाता है। रवि बिंदास अंदाज में शीतल से प्यार की पींगे बढ़ाता है वहीं रवि खामोश मोहब्बत करता है। शीतल रवि को दोस्त समझती है। उसको भी रवि के प्यार का अनुमान नहीं है। रोचक तरीके से कहानी कई दिलचस्प मोड़ लेती हुआ आगे बढ़ती है। रवि और विजय दोस्त से दुश्मन बन जाते हैं। कहानी के एक नाटकीय मोड़ से रवि को विजय की उसके प्रति भावना का पता चलता है। वो बेचैन हो जाता है। इस फिल्म को राज खोसला ने निर्देशित किया था। राज खोसला अपने जमाने के बेहतरीन निर्देशकों में गिने जाते थे। उन्होंने सलीम-जावेद की दोस्ताना की कहानी का ट्रीटमंट ऐसा किया कि दर्शकों को फिल्म भा गई। जो कहानी कई बार कही जा चुकी थी उसको दर्शकों का खूब प्यार मिला। 1980 में रिलीज हिट फिल्मों में दोस्ताना भी शामिल है। 

फिल्म दोस्ताना के बनने की कहानी भी दिलचस्प है। राज खोसला ने मराठी उपन्यास आशी तुझी प्रीत पर आधारित एक हिंदी फिल्म निर्देशित की थी जिसका नाम था ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’। इस फिल्म के बाद राज खोसला की शराब से ऐसी दोस्ती हुई कि वो कहने लगे थे कि अब फिल्म नहीं बस स्काच के साथ जिंदगी बिताई जाएगी। ये वही दौर था जब यश जौहर फिल्मों की पब्लिसिटी और प्रबंधन से मुक्त होकर फिल्म बनाना चाह रहे थे। वो राज खोसला के पास पहुंचे और उनसे फिल्म निर्देशित करने का अनुरोध किया। पहले तो राज खोसला ने मना कर दिया लेकिन यश जौहर ने हार नहीं मानी। उनके पास सलीम-जावेद की कहानी थी। सलीम जावेद का हिंदी फिल्मों में डंका बज रहा था। एक दिन यश जौहर ने राज खोसला से आग्रह किया कि वो कहानी सुन लें। खोसला ने जब कहानी सुनी तो हां कर दी। अब कास्टिंग की बात आरंभ हुई। अमिताभ को राज खोसला ने एक फिल्म में डायरेक्ट किया था। वो तय ही थे। जीनत अमान और विनोद खन्ना भी फाइनल किए गए। राज खोसला और विनोद खन्ना ने कई फिल्में साथ की थीं। दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती थी। फिल्म दोस्ताना की रिलीज के दो साल पहले मुकद्दर का सिकंदर रिलीज हुई थी। उस फिल्म में अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना दोनों की दमदार उपस्थिति थी। विनोद खन्ना अपेक्षाकृत अधिक खूबसूरत थे। सब तय हो गया था। कहानी में राज खोसला ने कुछ बदलाव बताए जिसको सलीम-जावेद ने स्वीकार कर लिया था। स्टारकास्ट भी फाइनल ही था। अचानक एक दिन राज खोसला ने कहा कि विनोद खन्ना को दोस्ताना में लेना ठीक नहीं होगा। जब उनसे कारण पूछा गया तो बोले कि नायिका विनोद खन्ना जैसे खूबसूरत हीरो को छोड़कर अमिताभ बच्चन के साथ क्यों जाएगी। यहीं से फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा के चयन का रास्ता साफ हुआ। 

1980 में रिलीज हुई फिल्म दोस्ताना को उसके गानों के लिए भी याद किया जाता है। सलीम खान कहते भी हैं कि राज कपूर के बाद राज खोसला को ही कहानी और उसमें संगीत के उपयोग की शानदार समझ थी। जिस तरह से राज कपूर संगीत को समझ कर अपनी फिल्मों में उसका उपयोग करते थे उसी तरह से राज खोसला भी अपनी फिल्मों को संगीत से बढ़ाते थे। इस गाने को याद करिए- मेरे दोस्त किस्सा ये क्या हो गया, सुना है कि तू बेवफा हो गया। आनंद बक्षी के इस गीत को मोहम्मद रफी की आवाज ने अमर कर दिया। फिल्म में कहानी के जिस मोड़ पर इस गाने का उपयोग राज खोसला ने किया वो बेहतरीन है। इसी तरह से फिल्म का आरंभ भी एक गीत से ही होता है जिसको मोहम्मद रफी और किशोर कुमार ने आवाज दी है। आनंद बक्षी ने लिखा और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने संगीत दिया । गाने के बोल हैं- सलामत रहे दोस्ताना हमारा। मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के साथ गाए गानों में ये गाना बहुत ही अधिक पसंद किया गया या कह सकते हैं कि अब भी किया जाता है। जब करेण जौहर कह रहे थे कि प्रेम त्रिकोण वाली फिल्में भारतीय दर्शक पसंद करते हैं तो उनके जेहन में अवश्य फिल्म दोस्ताना भी रही होगी क्योंकि बहुत लंबे समय तक धर्मा प्रोडक्शन की सबसे हिट फिल्म दोस्ताना ही थी। 


Monday, September 11, 2023

मोहब्बत की ‘चांदनी’


मैं तुमसे मोहब्बत करता हूं, मैं तुमसे मोहब्बत करता हूं, ये दो सादा से बोल जहां में पहली पहली बार न जाने किसने कहे और किससे कहे। जब जब ये बोल मोहब्बत की दुनिया में किसी ने दोहराए मासूम हंसी बेकल होकर दीवानावार चले आए। नेपथ्य से ये आवाज आती है और फिर चांदनी, चादनी, चांदनी की पुकार सुनकर सफेद कपड़ों में, सफेद दुपट्टा लहराती, सफेद धुंध के बीच श्रीदेवी जब परदे पर आती है तो सिनेमा हाल तालियों से गूंज उठता था। आप ठीक समझे हम बात कर रहे हैं आज से 39 वर्ष पहले आई फिल्म चांदनी की जिसने श्रीदेवी को लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचा दिया था। यश चोपड़ा की इस फिल्म में ऋषि कपूर, विनोद खन्ना और अनुपम खेर आदि भी थे लेकिन इसको श्रीदेवी की फिल्म के तौर पर याद किया जाता है। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के मध्यमवर्गीय परिवार की एक चुलबुली लड़की की भूमिका में श्रीदेवी ने उत्कृष्ट अभिनय किया। ये फिल्म इतनी सफल हुई थी कि 14 सितंबर 1989 को फिल्म के रिलीज होने के बाद युवतियों के फैशन में सफेद सलवार कमीज और दुपट्टे का चलन बढ़ गया था। इस फिल्म के पहले शायद ही किसी अभिनेत्री ने सफेद बिंदी लगाई हो। श्रीदेवी ने सफेद सलवार कमीज के साथ सफेद बिंदी लगाई। घुटनों से लंबी चोटी, हाथों में कांच की चूड़ियां पहनकर ये चुलबुली लड़की दर्शकों को अपने मोहपाश में बांध लेती थी। इस फिल्म कि नायिका के चेहरे का लावण्य और शिफान साडियों के गेटअप में पर्द पर उसकी उपस्थिति ऐसा रोमांटिक माहौल बनाती थी जिसमें दर्शक खो जाते थे। श्रीदेवी की नकल में उन दिनों लड़कियों ने भर भरकर हाथों में चूड़ियां पहनी थीं। यही इस फिल्म  की सफलता का बड़ा कारण था। रेचल डायर ने अपनी पुस्तक में यश चोपड़ा को उद्धृत किया है। यह बताया गया कि पहले भानु अथैया ने इस फिल्म का ड्रेस डिजायन किया था लेकिन वो यश चोपड़ा को पसंद नहीं आया। वो लीना को लेकर आए और सफेद और चटख रंगों के कपड़े तैयार करवाए गए। मध्यवर्गीय लड़कियों की पसंद को ध्यान में रखा गया। घर में होते हुए वो कैसे कपड़े पहनती हैं और आफिस में कैसी साड़ियां या कपड़े पहनती हैं। ये सोच जब पर्दे पर उतरा तो सफल रहा।  

श्रीदेवी ने फिल्म चांदनी में अपने अभिनय से दर्शकों का तो दिल जीता ही निर्देशक यश चोपड़ा का भरोसा भी जीता। बहुत कम लोगों को ये मालूम है कि श्रीदेवी चांदनी फिल्म के लिए यश चोपड़ा की पहली पसंद नहीं थीं। यश चोपड़ा चाहते थे कि रेखा इस भूमिका को निभाए। पता नहीं ये संयोग हो सकता है लेकिन यश चोपड़ा की फिल्म सिलसिला में रेखा का नाम चांदनी ही था। रेखा को यश जी ने इस फिल्म की कहानी सुनाई लेकिन रेखा इस भूमिका के लिए तैयार नहीं हुईं। रेखा के इंकार करने के बाद यश चोपड़ा ने श्रीदेवी को अपनी फिल्म में लिया। फिल्म के प्रदर्शन के समय यश चोपड़ा ने इस बात को स्वीकार किया था कि रेखा अपने समय की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्री है। जब मैंने चांदनी के लिए श्री को साइन किया था तब मुझे इस बात का यकीन नहीं था कि वो रेखा जितना अच्छा अभिनय कर पाएगी लेकिन शूटिंग के पहले शेड्यूल के समाप्त होते होते मुझे अपने चयन पर खुशी होने लगी थी। श्री ने कमाल कर दिया था और ऐसा लगने लगा था कि चांदनी तो वही है। इतना ही नहीं चांदनी फिल्म की मूल कहानी वो नहीं थी जो पर्दे पर आई। रेचल की पुस्तक में ही इस बात का भी जिक्र मिलता है कि मूल कहानी में ऋषि कपूर और श्रीदेवी की शादी हो जाती है और उनके एक बेटा भी होता है। इस कहानी के आधार पर दिल्ली में शूटिंग भी आरंभ हो गई थी। जब कुछ दिनों की शूटिंग हो गई तो यश चोपड़ा ने रील्स देखने शुरु किए। उनको मजा नहीं आया। अब वो कहानी बदलना चाहते थे। दिल्ली में शूटिंग के दौरान ही यश चोपड़ा ने पटकथा लेखक के साथ बैठकर मध्यांतर तक की कहानी बदल दी और उसको फिर से शूट किया। 

फिल्म चांदनी एक बेहरीन रोमांटिक फिल्म थी और ऐसा माना जाता है कि कयामत से कयामत तक, चांदनी और मैंने प्यार किया ने हिंदी फिल्मों में रोमांस की वापसी करवाई। 1988 में कयामत से कयामत तक आई फिर चांदनी और फिर मैंने प्यार किया। इसके पहले हिंदी फिल्मों में एक्शन का दौर था। यश चोपड़ा एक्शन फिल्मों से इतना ऊब चुके थे कि उन्होंने फिल्म चांदनी में विनोद खन्ना और श्रीदेवी का एक एक्शन सीक्वेंस हटा दिया। मूल कहानी में श्रीदेवी आग में फंसती है और विनोद खन्ना उनको बचाते हैं। यश जी को ये सीन रोमांटिक फिल्म में नहीं भा रहा था। जब उनके इस कदम के बारे में फिल्म के वितरकों को पता चला तो उन्होंने फिल्म से विनोद खन्ना के एक्शन दृश्य को हटाने का विरोध किया। उनका तर्क था कि विनोद खन्ना की फिल्म में एक्शन नहीं होगा तो फिल्म चलेगी नहीं। यश चोपड़ा उस सीन को हटाने पर अड़े थे और वितरक जुड़वाने पर। यश चोपड़ा ने एक तरकीब सोची, उन्होंने वितरकों को कम दर पर फिल्म देने का प्रस्ताव किया। वितरक तैयार हो गए। फिल्म चांदनी बिना विनोद खन्ना के एक्शनन दृश्य के सिनेमागृहों तक पहुंची। उसके बाद की कहानी तो इतिहास है लेकिन इस फिल्म की नायिका के गेटअप ने फैशन का जो ट्रेंड बदला वो हिंदी फिल्मों में सदैव याद रखा जाएगा।