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Saturday, August 30, 2025

फिर भी रहेंगी निशानियां


आज से करीब 70 वर्ष पूर्व राज कपूर की फिल्म श्री 420 आई थी। इस फिल्म ने राज कपूर के सोच और उनकी स्टोरीटेलिंग स्टाइल को बदल दिया। ये एक ऐसी फिल्म थी जिसने उनकी व्यक्तिगत जिंदगी में भी बदलाव देखा। श्री 420 के पहले राज कपूर की फिल्म आवारा आई थी। फिल्म आवारा जब रिलीज हुई थी तो फिल्म समीक्षकों ने उसमें एक मार्क्सवादी अंडरटोन होने की चर्चा की थी। संभव है ऐसा हो। हलांकि राज कपूर अपने साक्षात्कारों में हमेशा इस बात का निषेध करते थे कि वो किसी विचार या विचारधारा से प्रेरित होकर फिल्म बनाते हैं। फिल्म आवारा ख्वाजा अहमद अब्बास ने लिखी थी। अब्बास गहरे तक मार्क्सवादी विचारधारा में डूबे हुए थे। कहा जाता है कि जब इस फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखा गया थी तो ख्वाजा अहमद अब्बास और वी पी साठे ने बेहद चतुराई के साथ कई दृष्यों और संवादों में परोक्ष रूप से कम्युनिस्ट विचार और उन विचारों का पोषण करनेवाली स्थितियां लिख दी थीं। एक समीक्षक ने तब लिखा भी था कि ख्वाजा अहमद अब्बास एक वैचारिक गाइड थे। राज कपूर जब इस फिल्म को लेकर अमेरिका गए थे तो वहां इसके प्रदर्शन के दौरान उत्साह नहीं दिखा था। कुछ महीनों बाद जब वो आवारा के प्रदर्शन के लिए सोवियत संघ गए तो वहां जबरदस्त सफलता मिली। आवारा के प्रदर्शन के लिए सोवियत संघ जाने के पहले से ही श्री 420 फिल्म आकार लेने लगी थी। इस फिल्म का नाम भी दिलचस्प है। 420 भारतीय दंड संहिता की एक धारा थी जो धोखेबाजी के केस में लगाई जाती थी। उसके ही आधार पर इस फिल्म का नाम श्री 420 रखा गया था। 420 के आगे श्री जानबूझकर लगाया गया था ताकि विवाद ना हो।  

फिल्म आवारा की तरह इसके नायक का भी नाम राजू था। ये भी लगभग आवारा ही था लेकिन पढ़ा लिखा था। देश को स्वतंत्र हुए सात-आठ साल हुए थे। नौजवानों के अपने सपने थे। उन्हीं सपनों को केंद्र में रखते हुए राज कपूर ने इस फिल्म के नायक के चरित्र को गढ़ा था। आवारा में जिस तरह से मार्क्सवादी अंडरटोन की बात होती थी वैसे ही इस फिल्म में राष्ट्रवादी अंडरटोन देखा जा सकता है। इस फिल्म का गीत मेरा जूता है जापानी, सर पे लाल टोपी रूसी.. खूब लोकप्रिय हुआ था। हिन्दुस्तानी दिल को ढंग से इस गाने में रेखांकित किया गया था। इस फिल्म में राज कपूर और नर्गिस पर फिल्माया गया अमर गीत, प्यार हुआ इकरार हुआ है जिसमें एक पंक्ति है, हम न रहेंगे तुम न रहोगे फिर भी रहेंगी निशानियां। इस गाने के एक सीन में राज कपूर के तीन बच्चे रणधीर, रितु और ऋषि कपूर भी थे। बारिश में फिल्माए इस गीत के दौरान बच्चे रेन कोट पहनकर राज और नर्गिस के सामने से निकल जाते हैं। रितू कपर ने जब राज कपूर पर पुस्तक लिखी थी तो एक चर्चा में उन्होंने मुझे बताया था कि किस तरह से वो इस सीन के बाद अपने पिता का ख्याल रखने लगी थी। उनकी मां बताती थीं कि उनको अगर पिता से कुछ कहना होता था तो वो एक कागज पर लिख कर उनके तकिए पर रख देती थीं। रितू ने बताया था कि चूंकि उनके पिता को मोगरे की खुशबू पसंद थी इसलिए वो अपने संदेश के साथ उनके तकिए पर मोगरे के फूल भी रख देती थी। 

इस फिल्म का एक और गाना मुड़ मुड़ के ना देख, नादिरा पर फिल्माया गया था। ये गाना भी हिट रहा था। इसके पहले भी नादिरा ने कई कामेडी फिल्मों में काम किया था लेकिन इस गाने ने उनको लोकप्रियता की नई ऊंचाई दी। इस फिल्म के पहले राज कपूर और नर्गिस के बीच का प्रेम बहुत गाढ़ा हो चुका था । नर्गिस के भाई जब उनसे कहते कि राज कपूर उसकी स्टारडम का उपयोग अपनी फिल्मों को सफल बनाने में कर रहे हैं तो वो इसे नकार देती थी। उनके भाई जब उनसे कहते कि राज कपूर अपनी फिल्मों में नर्गिस की शोहरत के हिसाब से स्क्रीन टाइम नहीं देते हैं तो वो इस पर ध्यान नहीं देती थी क्योंकि तब वो राज के प्रेम में दीवानी थी। जब श्री 420 रिलीज हुई तो नर्गिस को लगा कि राज कपूर ने इस फिल्म में उनके साथ न्याय नहीं किया है। तबतक दोनों के प्रेम में उसके अंजाम तक पहुंचने को लेकर बहसें भी होने लगी थीं। श्री 420 के बाद नर्गिस, राज कपूर से दूर जाने लगी थी। श्री 420 के साथ राज कपूर के कई किस्से जुड़े हुए हैं लेकिन अगर फिल्म के लिहाज से देखें, उसके क्राफ्ट को देखें तो ये एक मास्टरपीस थी। ये अनायास नहीं है कि सत्यजीत राय श्री 420 को राज कपूर की सबसे अच्छी फिल्म मानते थे. कहते भी थे।