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Saturday, October 31, 2026

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव पर नजर


दो दिन बाद अमेरिका में मध्यावधि चुनाव है। पूरे विश्व की निगाहें इसपर लगी हैं। चुनाव का परिणाम का असर अमेरिका के राष्ट्रपति की कुर्सी पर नहीं पडेगा। ट्रंप अपने पूरे कार्यकाल तक राष्ट्रपति बने रहेंगे लेकिन अगर परिणाम उनकी पार्टी के विरुद्ध आया तो उनको कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका में होनेवाला मध्यावधि चुनाव ये तय करता है कि वहां की संसद (कांग्रेस) में किसको कितनी सीटें मिलेंगी। इस कारण वैश्विक चर्चा है कि अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस पर दबदबा रहेगा या फिर डेमोक्रैट्स का कब्जा होगा। अगर ट्रंप की पार्टी का कांग्रेस में बहुमत नहीं होता है तो संसदीय समितियों के माध्यम से ट्रंप प्रशासन के फैसलों की समीक्षा आरंभ हो जाएगी। अगर रिपब्लिकन को मध्यावधि चुनाव में जीत नहीं मिलती है तो उसको ट्रंप के काम काज पर जनता का निर्णय माना जा सकता है। नैरेटिव की लड़ाई में राष्ट्रपति ट्रंप कमजोर पड़ सकते हैं और डेमोक्रैट्स ये माहौल बनाने का प्रयास करेंगे कि जनता राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों से खुश नहीं है। संभव है कि इसका असर 2028 में होनेवाले राष्ट्रपति चुनाव पर पड़े। 

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में कई सारे मुद्दे हैं। मतदान के दो दिन पहले ट्रंप के समर्थक अरबपति उदयोगपति एलन मस्क ने अपने एक बयान से कई प्रकार की चर्चा को जन्म दे दिया। एलन मस्क ने एक्स पर पोस्ट किया कि डेमोक्रैट्स अमेरिका में जीते तो अमेरिका का खेल ही खत्म हो सकता है। मस्क का मानना है कि अगर डेमोक्रैट्स 2028 के चुनाव में प्रतिनिधि सभा, सीनेट और राष्ट्रपति पद पर जीत जाते है तो अमेरिका की व्यवस्था में भारी परिवर्तन हो सकता है। उनका दावा है कि सत्ता में आने पर डेमोक्रैट्स वाशिंगटन डीसी और प्यूर्टो रिको को राज्य का दर्जा दे सकते हैं ताकि सीनेट में उनकी संख्या बढ़ सके। इसके अलावा अवैध प्रवासियों को मान्यता देने जैसे कदम भी उठा सकते हैं। इसका लाभ ये हो सकता है कि उनको स्थायी मतदाता मिल जाए। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर अपने पक्ष में कर सकते हैं। एलन मस्क यहां तक कह जाते हैं कि रिपब्लिकन की हार का मतलब होगा अमेरिका में एक दलीय व्यवस्था की ओर बढ़ना जिससे कि लोकतंत्र का अर्थ ही समाप्त हो जाएगा। हमें इसपर विचार करना होगा कि एलन मस्क ऐसा क्यों कह रहे हैं। मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (मागा) जैसे नारे के पीछे एलन मस्क की सहमति मानी जाती रही है। वो डेमोक्रैट्स को विभाजन और नफरत की पार्टी मानते हैं। वो लेफ्ट के विरोधी हैं और कहते रहे हैं कि लेफ्ट के जीतने से अमेरिका बर्बाद हो जाएगा। ऐसे में अगर ट्रंप की पार्टी हारती है तो एलन भी कमजोर हो सकते हैं। एलन मस्क के पास अकूत संपत्ति है और डेमोत्रैट्स को उनका समर्थन बहुत मायने रखता है। अमेरिका विशेषकर रिपब्लकिन की राजनीति में एनल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं कि वो राजनीतिक चंदे के रूप में एक बड़ी राशि डेमोकैट्स को देते हैं। दूसरी तरफ जार्ज सोरोस और अन्य धनवान समर्थक हैं। अमेरिकी मीडिया के अनुसार एलन मस्क अबतक चुनाव में करीब 3700 करोड़ रुपए खर्च कर चुके हैं या चंदा के रूप में अपनी पसंदीदा पार्टी को दे चुके हैं। इतनी बड़ी धनराशि देनेवाला व्यक्ति अगर कुछ कहता है तो राजनीति उसपर विचार अवश्य करती है। 

एलन मस्क के उक्त बयान के पहले अमेरिका का मध्यावधि चुनाव मुख्य रूप से ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के फैसलों, नागरिकों के जीवनयापन पर बढ़ते खर्च, अप्रवासी नीतियों, स्वास्थ्य सेवा, तकनीकी कंपनियों का समाज पर बढ़ते प्रभाव आदि पर केंद्रित था। चर्चा ट्रंप के निर्णयों पर होती थी। पिछले महीने के मध्य में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग करीब 31 प्रतिशत रही थी। उसके बाद से चर्चा का बाजार गर्म हो रहा था। मुद्दों पर चर्चा करने से पहले हमें ये समझ लेना चाहिए कि अमेरिका के मध्यावधि चुनाव होते कैसे हैं। अमेरिका में शासन व्यवस्था के तीन प्रमुख अंग हैं। पहला कांग्रेस (संसद) जिसमें हाउस आफ रिप्रजेंटेटिव और सीनेट दो सदन होते हैं। ये दोनों सदन मिलकर संघीय कानून बनाते हैं। दूसरा राष्ट्रपति और तीसरा सुप्रीम कोर्ट। अमेरिकी व्यवस्था में इन तीनों शाखाओं की संरचना इस तरह से की गई है कि कोई भी एक अंग अराजक नहीं हो सके। अब मध्यावधि चुनाव को समझने के लिए हाउस आफ रिप्रजेंटेटिव और सीनेट की संरचना को समझना होगा। हाउस आफ रिप्रजेंटेटिव में 435 सदस्य होते हैं जो दो वर्षों के लिए चुने जाते हैं। किस राज्य से कितने सदस्य हाउस आफ रिप्रजेंटेटिव में होंगे ये उनकी जनसंख्या के आधार पर तय होता है। इसी तरह से सीनेट में कुछ 100 सदस्य होते हैं। प्रत्येक राज्य से दो सदस्य। इनका कार्यकाल छह वर्षों का होता है लेकिन एक तिहाई सदस्यों का चुनाव हर दो वर्ष पर होता है। 

2026 के मध्यावधि चुनाव में मोटे तौर पर तीन तरह की संभावना बनती है। पहली ये कि रिपब्लिकन का दोनों सदनों में बहुमत हो जाए। ट्रंप के लिए ये आदर्श स्थिति होगी क्योंकि अगर ऐसा होता है तो वो अपने एजेंडे को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ा सकेंगे। दूसरी स्थिति ये हो सकती है कि डेमोक्रैट्स का हाउस आफ रिप्रजेंटेटिव में बहुमत हो लेकिन रिपब्लिकन सीनेट में बहुमत में रहें। इस स्थिति में हाउस आफ रिप्रजेंटेटिव किसी मसले की जांच कर सकती है, सुनवाई कर सकती है और राष्ट्रपति के फैसलों को चुनौती दे सकती है। सीनेट में बहुमत नहीं होने से कानून पास करना कठिन होगा। तीसरी स्थिति ये हो सकती है कि डेमोक्रैट्स को दोनों सदनों में बहुमत मिल जाए। इस स्थिति में राष्ट्रपति ट्रंप के लिए विधायी बाधाएं चुनौती बनकर खड़ी रहेंगी। उनको अपने निर्णयों को क्रियान्वयित करने में देरी हो सकती है। एक अन्य मुद्दा तकनीकी कंपनों का बढ़ता वर्चस्व भी चर्चा में हैं। बड़ी तकनीकी कंपनियां, डाटा सेंटर और एआई को लेकर वहां चुनावी बहस छिड़ी हुई है। बड़े डाटा सेंटर में बड़े बड़े सर्वर लगे हैं जो सूचनाओं को संचित करते हैं, उसको प्रोसेस करते हैं और क्लाउट कंप्यूटिंग और आनलाइन प्लेटफार्म्स को सेवाएं देते हैं। एआई के बढ़ते चलन के कारण बड़े डाटा सेंटर्स की मांग बढ़ रही है। इन डाटा सेंटर्स को लेकर चिंता भी बढ़ रही हैं। इनको चलाने के लिए बिजली की मांग में बेतहाशा वृद्धि हो सकती है। बिजली के अलावा इन डाटा सेंटर्स के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। इसका पर्यावरण पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। 


दैनंदिन जीवन में तकनीक का प्रभाव बढ़ रहा है। व्यक्तिगत आदतों से लेकर रुचियां तक उन कंपनियों को मालूम पड़ जा रही हैं। इसका उपयोग राजनीतिक कैंपेन से लेकर कसेंट बनाने तक में किया जा रहा है। इसको लेकर भी अमेरिकी वोटर सशंकित हैं। तकनीक के बढ़ते चलन के साथ साथ चुनाव में बड़ी मात्रा में धन के खर्च होने पर भी चिंता जताई जा रही है। कुल मिलाकर पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के परिणाम पर टिकी हैं। मध्यावधि चुनाव के परिणाम से वैश्विक परिजृष्य पर भी फर्क पड़ेगा विशेषकर युद्ध वाले क्षेत्रों पर। 


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