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Sunday, April 17, 2016

सितारों के बायोपिक का दौर

जब फिल्म पान सिंह तोमर आई तो उसकी सफलता ने लोगों को चौंकाया था । कम लागत में बनी इस फिल्म को तारीफ तो मिली ही थी इसने जमकर मुनाफा भी कमाया था । पान सिंह तोमर भारतीय फौज में थे और उन्होंने उन्नीस सौ अट्ठावन के तोक्यो एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया था । इस बायोपिक को लोगों ने पसंद किया था क्योंकि इसमें एक फौजी के बागी बनने की कहानी थी । चंबल के रहनेवाले पान सिंह ने किस तरह से बंदूक उठाई उसको फिल्मकार ने दर्शकों के सामने परोसा था । इसके बाद तो हिंदी फिल्मों में बॉयोपिक का दौर चल पड़ा । दो हजार तेरह में ओलंपियन मिल्खा सिंह पर बनी फिल्म भाग मिल्खा भाग ने तो सफलता के तमाम रेकॉर्ड धवस्त करते हुए एक सौ नौ करोड़ का बिजनेस कर डाला । मिल्खा सिंह की जिंदगी भी पान सिंह तोमर की तरह ही नाटकीय है । उसमें सफल बॉलीवुड फिल्म के सारे तत्व मौजूद हैं । भारत विभाजन के बाद हुए दंगों में मिल्खा सिंह के माता-पिता की जान चली गई थी । उसके बाद वो दिल्ली आते हैं फिर सेना में शामिल होकर ओलंपिक गेम्स तक पहुंचते हैं । आज भी लोग मिल्खा सिंह को उड़न सिख कहते हैं तो उनके जेहन में उन्नीस सौ साठ का ओलंपिक आता है जब पलभर से मिल्खा सिंह पदक से चूक गए थे । चार सौ मीटर की उस रेस में मिल्खा सिंह आधी दूर तक सबसे आगे थे लेकिन उसके बाद वो पिछड़ गए थे । करीब पौने छियालीस सेकेंड का उनका रिकॉर्ड भारत में चार दशकों तक कायम रहा था और कोई भी धावक उसको पार नहीं कर पाया था । एक तो भारत विभाजन का वक्त, दूसरे एक परिवार के तहस नहस होने के बाद उसके सदस्य का उठ खड़ा होना लोगों को भा गया ।  इसी तरह से पिछले दिनों बॉक्सर मैरी कॉम पर प्रियंका चोपड़ा अभिनीत बॉयोपिक मैरी कॉम आई थी । प्रियंका चोपड़ा के शानदार अभिनय और उत्तर पूर्व के राज्य मणिपुर के एक छोटे से कस्बे से निकलकर मैरी कॉम पांच बार एमैच्योर बॉक्सिंग की विश्व चैंपियन रहीं । मैरी कॉम ने ना केवल इचियोन एशिएयन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था बल्कि ओलंपिक में भी अपने मुक्के का कमाल दिखाया था । उस वक्त मैरी कॉम पूरे देश में नायिका की तरह उभरी थीं । मैरी कॉम पर बनी फिल्म भी हिट रही थी और इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक उसने बासठ करोड़ का बिजनेस किया था । दरअसल होता यह है कि स्पोर्ट्स के सितारों के जीवन पर फिल्म बनाने के लिए  बॉलीवुड के फिल्मकार और निर्देशक ज्यादा उत्साहित रहते हैं । उस उत्साह की कई वजहें हैं लेकिन सबसे बड़ी वजह है तैयार बाजार मिलता है । इस तैयार बाजार का फायदा यह होता है कि यहां मुनाफे की गुंजाइश ज्यादा रहती है । तैयार बाजार को भुनाने के लिए फिल्मकार उन खिलाड़ियों की जिंदगी की ओर आकर्षित होते हैं जिनके साथ किंवदंतियां, किस्से कहानियां जुड़े हों और लोग उसके बारे में जानने के लिए उत्सुक हों । इसके अलावा भारतीय दर्शक कुछ अलग देखने की चाहत भी रखते हैं । अपने नायक को रूपहले पर्दे पर देखने की उनकी ख्वाहिश भी उनको सिनेमा हॉल तक खींच सलाती हैं । इसके अलावा अपने नायक के जीत को वभारत का दर्शक बार-बार देखना चाहता है । अगर फिलमकार दर्शकों के इस मनोविज्ञान को पकड़कर ठीक से उसको फिल्मा देता है तो फिल्म के सफलता की गारंटी रहती है । इसके अलावा एक और वजह होती है खिलाड़ियों की लोकप्रियता को भुनाने की, लेकिन यहां एक पेंच भी होता है । वो पेंच है लोकप्रियता के साथ या तो संघर्ष हो या फिर कोई लंबे समय तक चला विवाद । इसका फायदा यह होता है कि फिल्मकारों को और निर्देशकों को अपनी रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को दिखाने के लिए खुले आकाश जैसा विस्तार  मिलता है जहां वो खुल कर खेल सकते हैं ।
अब अगर देखें तो इस वक्त तीन क्रिकटरों के अलावा एक गणितज्ञ और एक पहलवान पर बायोपिक आने वाली है । पहली फिल्म आ रही है टीम इंडिया के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन पर । फिल्म का नाम है अजहर । इस फिल्म में अजहरुद्दीन की भूमिका निभा रहे हैं इमरान हाशमी और ये तेरह मई को रिलीज होगी । अब अगर हम अजहरुद्दीन की जिंदगी पर नजर डालते हैं तो ये एक फिल्म की परफेक्ट स्क्रिप्ट की तरह नजर आती है । अजहर की जिंदगी जहां एक सितारे की बनने की दास्तां है, उसके बाद उसके बॉलीवुड की एक नायिका के साथ प्रेम है, विवाह है और फिर है अलगाव । कहानी इतने पर ही नहीं रुकती है । भारतीय क्रिकेट का ये सितारा मैच फिक्सिंग के जाल में भी फंसता है । मैच फिक्सिंग की फांस में घिरे इस क्रिकेट कप्तान पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाता है फिर लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उसको हाईकोर्ट से मामूली राहत मिलती है । इस बीच वो शख्स राजनीति में आता है और सांसद बन जाता है । पारिवारिक जिंदगी में भी दर्द का सामना करना पड़ता है । इस बीच एक अन्य बैडमिंटन खिलाड़ी से उसके रोमांस की खबरें आम होती है हलांकि वो प्यार परवान नहीं चढ़ सकता है । तो जहां जिंदगी में इतना मसाला हो वहां बॉलीवुड की नजर ना जाए, संभव ही नहीं है । अजहर के बाद दूसरी फिल्म आ रही है टीम इंडिया के कैप्टन कूल महेन्द्र सिंह धौनी पर । इस फिल्म का नाम है – एम एस धोनी, द अनटोल्ड स्टोरी और ये सितंबर के पहले सप्ताह में रिलीज होने को तैयार है । इस फिल्म में धोनी के किरदार को निभाया है अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने । अब धौनी की जिंदगी में सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद के साथ साथ उनकी कहानी लगातार किंवदंती बनती जा रही है । कई बार ये किस्सा सामने आया है कि किस तरह से धौनी अपना एक क्रिकेट मैच खेलने के लिए रांची से पूर्वोत्तर के किसी राज्य में पहुंचे थे । इसके अलावा रेलवे के टिकट चैकर की नौकरी से अरबपति होने की दास्तां अपने आप में दिलचस्प है । इसी तरह से आमिर खान की फिल्म दंगल भी हरियाणा के मशहूर पहलवान महावीर सिंह फोगट की जिंदगी पर आधारिक हैं । यहां भी इस चरित्र के साथ किंवदंतियां जुड़ी हुई हैं ।

बॉलीवुड की नजर अजहर और धोनी पर तो जाती है लेकिन उनकी नजर सचिन तेंदुलकर या फिर सुनील गावस्कर पर नहीं जाती है । ये दोनों क्रिकेटर महानतम खिलाड़ियों में से एक हैं लेकिन इनके संघर्ष में मसाला नहीं लिहाजा इनपर बॉलीवुड की नजर नहीं गई । सचिन तेंदुलकर पर फिल्म आ रही है जो बना रहे हैं हॉलीवुड के जेम्स इर्सकिन सचिन पर फिल्म बना रहे है जिसका नाम है सचिन-अ बिलियन ड्रीम्स । इस फिल्म का एक पोस्टर भी हाल ही में रिलीज किया गया है । फिल्म के पोस्टर के रिलीज के मौके पर सचिन तेंदुलकर ने कहा कि कैमरे को फेस करना किसी भी फास्ट बॉलर को फास्ट पिच पर खेलने के कठिन है । खैर ये अवांतर प्रसंग है । हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड की बायोपिक फिल्मों की । दरअसल यही बुनियादी फर्क है बॉलीवुड या हॉलीवुड में । बॉलीवुड में नजर होती है मसाला और मुनाफा पर जबकि हॉलीवुड कला पर भी अपना ध्यान केंद्रित करता है । हमारे देश के फिल्मकार बाबा साहब भीमराव अंबेडकर या फिर सरदार पटेल पर फिल्म बनाने के लिए सरकार का मुंह जोहते हैं और सरकारी मदद के बाद हीइन शख्सियतों पर फिल्में बनाते हैं । यह विंडबना ही कही जाएगी कि गांधी पर अबतक की सबसे बेहतरीन फिल्म भारत से बाहर बनी है । रिचर्ड अटनबरो को ही गांधी में संभावना नजर आई और उन्होंने विश्व प्रसिद्ध फिल्म का निर्माण किया । गांधी पर बनी ये फिल्म उन्नीस सौ बयासी में रिलीज हुई थी । बेन किंग्सले अभिनीत इस फिल्म की याद करीब तीन दशक से ज्यादा बीच जाने के बाद भी भारतीय मानस में ताजा है । इसी तरह से हॉलीवुड से महान गणितज्ञ रामानुजन पर बनी फिल्म 29 अप्रैल को रिलीज हो रही है । द मैन हू न्यू इनफिनिटी के बनने की बेहद दिलचस्प दास्तां हैं । रॉबर्ट केनिगेल की किताब- द मैन हू न्यू इनफिनिटी, ए लाइफ ऑफ द जीनियस रामानुजन को अमेपिकर स्क्रिप्ट राइटर मट ब्राउन ने ढूंढ निकाला और उसपर फिल्म बनी । पिछले साल इसका प्रीमियर टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में हो चुका है । पिछले साल गोवा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म को दिखाया गया था । अब ये फर्क साफ तौर पर देखा जा सकता है । दरअसल बॉलीवुड में फिल्म मेकिंग शुद्ध कारोबार है और फिल्म या कहानी का चयन मुनाफे को ध्यान में रखकर किया जाता है । बॉयोपिक अगर ज्यादा बन रहे हैं तो इसके पीछे भी भाग मिल्खा भाग और मैरी कॉम की सफलता है । इस बात को फिल्म से जुड़े लोग स्वीकार भी करते हैं । इंतजार तो इस बात का है कि कब हमारे यहां भी असल मायने में बायोपिक बनाने वाले फिल्मकार सामने आएं ।