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Thursday, June 11, 2020

अंगूठी और समंदर का खामोश अफसाना


कुछ दिनों पहले जब ऋषि कपूर का निधन हुआ था तो मनोरंजन चैनलों पर ऋषि कपूर के पुराने इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हुए। कपिल शर्मा के शो में ऋषि और नीतू सिंह वाला एपिसोड भी खूब चला। उस एपिसोड में जब ऋषि कपूर की प्रेमिकाओं की बात हो रही थी तो कपिल शर्मा ने नीतू सिंह से एक अंगूठी के बारे में पूछा, जब नीतू सिंह ने कहा कि वो उनके पास है तो ऋषि ने कहा कि छोड़ो वो किस्सा यार वो किसी के पास नहीं है वो तो समंदर में है। दरअसल ये बात हो रही थी ऋषि कपूर की उस अंगूठी के बारे में जो उनको उनकी पहली प्रेमिका यासमीन मेहता ने अपने प्रेम की निशानी के तौर पर दी थी। ये एक बेहद साधारण अंगूठी थी लेकिन उसपर एक खास तरह का चिन्ह बना हुआ था। ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा ‘खुल्लम खुल्ला’ में लिखा है कि जब वो लोग बॉबी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे तो डिंपल ने उस अंगूठी को उनकी उंगुली से निकालकर अपनी उंगली में पहन लिया था। फिर डिंपल ने उसको लौटाया नहीं और उस अंगूठी को पहनती रही। बॉबी फिल्म की शूटिंग के दौरान ही राजेश खन्ना ने डिंपल को देखा और उसको अपना दिल दे बैठे। उस समय राजेश खन्ना सुपर स्टार थे और उनकी लोकप्रियता चरम पर थी। राजेश खन्ना ने डिंपल को प्रपोज किया और दोनों शादी के बंधन में बंध गए। लेकिन इस बीच एक बेहद दिलचस्प किस्सा हुआ। जब राजेश खन्ना ने डिंपल को प्रपोज करने के लिए उनका हाथ अपने हाथ में लिया तो उनको वो अंगूठी दिखाई दी जो डिंपल ने ऋषि की उंगली से उतारकर अपनी उंगली में पहन रखा था। राजेश खन्ना को डिंपल की खूसूरत उंगली में वो अंगूठी नहीं भायी और उन्होंने डिंपल के हाथ से उस अंगूठी को उतारकर जूहू के अपने घर के नजदीक समंदर में उछाल दिया। ऋषि कपूर और यासमीन के प्यार की निशानी जो डिंपल की उंगली में चमकती थी वो समंदर के आगोश में समा गई। उस वक्त फिल्मी गॉसिप छापने वाली पत्रिकाओं में छपा भी था, राजेश खन्ना ने ऋषि कपूरी की अंगूठी समंदर में फेंकी। लेकिन ऋषि ने साफ तौर पर कहा है कि उनको डिंपल से कभी प्यार नहीं था, न ही उनको प्रति आकर्षित थे। हां उन्होंने इतना जरूर माना कि वो डिंपल को लेकर थोड़े पजेसिव थे।
बॉलीवुड सितारों की अंगूठी, उनकी मोहब्बत और समंदर का ये रोमांटिक जिक्र पहली बार नहीं हुआ। इसके पहले देवानंद ने भी अपनी आत्मकथा ‘रोमासिंग विद लाइफ’ में भी किया है। देवानंद और सुरैया का प्रेम परवान चढ़ रहा था लेकिन सुरैया की नानी को ये पसंद नहीं आ रहा था और उन्होंने साफ तौर पर सुरैया को ये संदेश दे दिया था कि अगर ये प्रेम सबंध आगे बढ़ा तो या तो सुरैया रहेगी या उनकी नानी। लेकिन सुरैया की मां अपनी बेटी और देवानंद के प्यार के पक्ष में थी। जब सुरैया के प्यार पर पहरा लगा था तो उनकी मां ने ही देवानंद और सुरैया को रात साढे ग्यारह बजे के बाद अपने अपार्टमेंट की छत पर मिलने का इंतजाम किया था। देवानंद ने अपनी आत्मकथा में बेहद रोचक तरीके से इस मुलाकात का उल्लेख किया है। उसी मुलाकात में सुरैया ने देवानंद से अपने प्रेम का इजहार किया था और उनसे आलिंगबद्ध होकर ‘आई लव यू’ कहा था। प्यार के इस मोड़ पर देवानंद इतने खुश थे कि उन्होंने अगले ही दिन मुंबई के झवेरी बाजार से सुरैया के लिए एक एक बेहद खूबसूरत अंगूठी खरीदी। अब समस्या ये थी कि सुरैया तक अंगूठी पहुंचे कैसे। देवानंद फोन करें तो सुरैया की नानी उठाएं और ये फोन रख दें। संपर्क का कोई सूत्र नजर नहीं आ रहा था। अचानक देवानंद को अपने सिनेमेटोग्राफर मित्र दिवेचा याद आए। दिवेचा पहले भी देवानंद और सुरैया के बीच प्रेम-पत्रों के आदान प्रदान का माध्यम बन चुके थे। जब दिवेचा को देवानंद ने फोन किया तो उन्होंने पूछा कि क्या फिर से प्रेम-पत्र पहुंचाना है। एक दिन पहले ही सुरैया से मिल चुके देवानंद ने बेहद खुशी के साथ कहा था कि नहीं इस बार इंगेजमेंट रिंग पहुंचाना है। फिर दिवेचा ने देवानंद की वो अंगूठी सुरैया तक पहुंचा दी। अब देवानंद की खुशी सातवें आसमान पर थी और वो ये मानकर बैठे थे कि उनकी इंगेजमेंट हो गई लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। सुरैया की नानी और उनके रिश्तेदारों ने मिलकर सुरैया पर इतना दबाव बनाया कि वो देवानंद से संबंध तोड़ने पर राजी हो गई। सुरैया जब इस बात के लिए राजी हो गई तो एक दिन वो देवानंद की अंगूठी लेकर समदंर के किनारे पहुंची। उसे अपनी उंगली से उतारा और आखिरी बार देखा, देवानंद के साथ के अपने प्यार को याद किया और फिर अंगूठी को सागर की लहरों पर उछाल दिया। उन लहरों ने देवानंद और सुरैया के प्यार की निशानी को अपने आगोश में ले लिया। फिर समंदर शांत हो गया और सुरैया अपने घर लौट आई।

Saturday, June 15, 2019

हुस्न और सुर का संगम सुरैया


सुरैया, भारतीय सिनेमा का एक ऐसा नाम है जिसने अपने हुस्न और गायकी से पूरे मुल्क को चकाचौंध कर दिया। उनके जैसा दूसरा कोई हुआ नहीं। गायिका-अभिनेत्री सुरैया का जलवा ऐसा कि फिल्मों में होना मतलब सफलता की गारंटी। सुरैया बाल-कलाकार के तौर पर फिल्मों में आईं लेकिन समय के साथ जब नायिका की भूमिका निभानी शुरू कीं तो फिर तो पृथ्वीराज कपूर से लेकर सहगल साहब के साथ काम करने लगीं। पृथ्वीराज कपूर को सुरैया पापाजी कहती थी और उनसे डरती भी बहुत थी। एक के बाद एक दर्जनभर हिट फिल्में सुरैया के नाम हैं।   सुरैया के अभिनय और गायिकी के कॉकटेल का जादू भारतीय दर्शकों के होश उड़ा देता था। जहां से वो निकल जाती थीं तो ट्रैफिक जाम हो जाता था। मुंबई के मरीन ड्राइव के उनके घर के बाहर हर रोज तमाशा होता था। क्या फिल्म प्रोड्यूसर, क्या डायरेक्टर, क्या अभिनेता सभी सुरैया पर जान छिड़कते थे। एक समय तो ऐसा आया कि एक शख्स सुरैया के घर के बाहर प्रणय निवेदन करते हुए धरने पर बैठ गया। पुलिस कार्रवाई में बेचारे आशिक को वहां से रुखसत होना पड़ा। इसी तरह एक बार बेहद दिलचस्प वाकया तब हुआ जब सुरैया और उसकी मां अपने फ्लैट में थी। अचानक फ्लैट के बार जोर-जोर से बैंड बजने की आवाज आने लगी। धीरे धीरे बैंड का शोर बढ़ता ही चला गया। सुरैया और उसकी मां को आनेवाले खतरे का अंदाजा नहीं था। जब बैंड का शोर काफी बढ़ गया तो सुरैया की मां ने अपने फ्लैट का दरवाजा खोला तो उनके ही दरवाजे पर बैंड बज रहा था और एक शख्स दूल्हे की पोशाक पहनकर सामने खड़ा था। सुरैया की मां ने जब उससे पूछा कि क्या बात है तो उसने कहा कि वो सुरैया से शादी करने के लिए पूरी बारात लेकर जालंधर से यहां आया है। जब तक उसकी मां कुछ समझ पाती तबतक दूल्हा पूरी बारात समेत उनके फ्लैट में दाखिल हो गया। बाराती और दूल्हा सुरैया से शादी रचाने पर जोर डालने लगे। इस बीच सुरैया ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। सुरैया की मां के लाख समझाने के बाद भी जालंधर वाले टस से मस नहीं हो रहे थे। वो चीखने चिल्लाने लगे थे कि इतने महंगे गहने बनवा कर लाए हैं, इतनी साडियां लेकर आए हैं, बारात पर इतना खर्च किया है बगैर शादी के वापस नहीं जाएंगे। सारे गहने बक्से से निकालकर उन्होंने सुरैया की मां के सामने रख दिया। लाखों के गहने और साडियां। इस बीच कुछ बाराती बदतमीजी पर उतारू होने लगे तो सुरैया कि मां ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने लाठी डंडा मारकर सबको बाहर निकाला और दूल्हा बेचारा सारे गहने आदि समेट कर वापस जालंधर चला गया। लेकिन सबसे दिलचस्प रही थानेदार की टिप्पणी। उसने जाते-जाते सुरैया की मां से कहा कि पता नहीं आप लोग क्या करते हो कि कभी कोई खुदकुशी करने चला आता है तो कभी कोई शादी के लिए धरने पर बैठ जाता है तो कभी बारात लेकर घर में घुस आता है। जाते जाते चेता भी गया कि अब आगे से कुछ करना मत।
सुरैया ने गाने की कोई औपचारिक ट्रेनिंग कभी नहीं ली थी। समय की मांग ने उनको गायिका बना दिया था। जब नर्गिस लोकप्रिय होने लगीं तो सुरैया का सिंहासन डोला, फिर कामिनी कौशल और निम्मी से सुरैया को टक्कर मिली। इसी दौर में मधुबाला का भी फिल्मों में पदार्पण हुआ। एक साथ इन नायिकाओं की फौज ने सुरैया की सल्तनत को चुनौती दी थी। सुरैया और देवानंद के प्रेम पर बहुत कुछ कहा और लिखा जा चुका है लेकिन लाहौर से मुंबई आई इस अभिनेत्री ने फिल्म इंडस्ट्री पर अपनी शर्तों पर राज किया और फिर अपनी ही शर्तों पर इससे अलग भी हो गईं।