Translate

Showing posts with label महेश भट्ट. Show all posts
Showing posts with label महेश भट्ट. Show all posts

Saturday, October 24, 2020

फिर विवादों के भंवर में महेश भट्ट


हिंदी फिल्म जगत और ड्रग्स का मामला थमता नजर नहीं आ रहा है। अभी सुशांत सिंह राजपूत के केस में ड्रग्स का मामला उछला था और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने दीपिका पादुकोण समेत कई अभिनेत्रियों से घंटों तक पूछताछ की थी। अभी ये मामला शांत भी नहीं हुआ था कि एक दूसरे मामले में निर्देशक महेश भट्ट का नाम ड्रग्स के आरोपों से जुड़ गया है। फिल्म ‘कजरारे’ की अभिनेत्री लवीना लोध ने एक मिनट अड़तालीस सेंकेंड का एक वीडियो जारी कर महेश भट्ट पर सनसनीखेज आरोप लगाया है। लवीना ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट विडियो में कहा है कि ‘मेरी शादी महेश भट्ट के भांजे सुमित सभलवाल के साथ हुई थी और मैंने उनके खिलाफ डायवोर्स केस फाइल किया है क्योंकि मुझे पता चल गया था कि वो ड्रग सप्लाई करते हैं एक्टर्स को...उनके फोन में भी अलग अलग किस्म की लड़कियों की तस्वीरें होती हैं जो वो डायरेक्टर्स को दिखाते हैं...और इन सारी बातों की जानकारी महेश भट्ट को है। महेश भट्ट सबसे बड़ा डॉन है इंडस्ट्री का। ये पूरा सिस्टम वही ऑपरेट करता है और अगर आप उनके हिसाब से नहीं चलते हैं तो वो आपका जीना हराम कर देते हैं। महेश भट्ट ने कितने लोगों की जिंदगी बर्बाद कर दी है, कितने एक्टर्स, डायरेक्टर्स को उन्होंने काम से निकाल दिया है, वो एक फोन करते हैं पीछे से और लोगों का काम चला जाता है। लोगों को पता भी नहीं चलता है। ऐसे उन्होंने बहुत जिंदगियां बर्बाद की हैं। और जबसे मैंने उनके खिलाफ केस फाइल किया है वो हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ गए हैं। अलग अलग तरीके से मेरे घर में घुसने की कोशिश कर रहे हैं, पूरी कोशिश की उन्होंने मुझे इस घर से निकालने की। जब मैं पुलिस स्टेशन में शिकायत (एनसी) लिखाने जाती हूं तो कोई मेरी शिकायत भी नहीं लेता। बहुत मुश्किल के बाद अगर मैं शिकायत लिखा भी देती हूं तो कोई एक्शन नहीं होता।‘ लवीना लोध यहीं पर नहीं रुकती हैं और वो ये भी कहती हैं कि अगर कल कोई हादसा उनके या उनके परिवार के साथ होता है तो सिर्फ महेश भट्ट, मुकेश भट्ट सुमित सभरवाल, आदि उसके लिए जिम्मेदार होंगे। लवीना का कहना है कि वो ये वीडियो इस लिए भी बना रही हैं कि लोगों को पचा चले कि बंद दरवाजे के पीछे इन लोगों ने कितनी जिंदगियां बर्बाद की हैं और ये क्या क्या कर सकते हैं। वो अपनी बात इस वाक्य पर खत्म करती हैं कि महेश भट्ट बहुत ही ताकतवर और प्रभावशाली हैं। अगर एक मिनट को इसको पारिवारिक कलह भी मान लिया जाए तो इसमें जो ड्रग्स की बात सामने आ रही है या अन्य आरोप लगे हैं उसकी जांच तो की जा सकती है। लवीना ने तो जिन एक्टर्स को ड्रग्स की सप्लाई की जाती है उनके नाम भी इस वीडियो में लिए हैं। 

सुशांत सिंह राजपूत के केस में रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी भी आरोपों के आधार पर ही हुई थी। दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, सारा अली खान और रकुलप्रीत जैसी मशहूर अभिनेत्रियों से घंटों पूछताछ भी सिर्फ आरोपों के आधार पर हुई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस तत्परता के साथ नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड ने इतनी मशहूर और प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों से पूछताछ की थी वैसी ही सक्रियता लवीना के आरोपों पर भी दिखाई जाएगी? अगर ये नहीं होता है तो क्या ये माना जाए कि अभिनेत्री लवीना की उन बातों में दम है कि महेश भट्ट बेहद ताकतवर और प्रभावशाली हैं। महेश भट्ट पहले भी कई तरह के व्यक्तिगत और अन्य विवादों में घिरते रहे हैं। अगर उस दौर की फिल्मी और अन्य पत्रिकाओं के लेखों को देखें तो उनके और परवीन बॉबी के रिश्ते को लेकर बहुत कुछ लिखा गया था। कहा गया  था कि परवीन से अफेयर की वजह से उनका पारिवारिक कलह हुआ था। उन्होंने अपनी पहली पत्नी किरण भट्ट और बेटी पूजा को छोड़कर परवीन के साथ रहना शुरू कर दिया था। परवीन जब सिजोफ्रेनिया की गिरफ्त में आईं तो वो उनको छोड़कर अपने परिवार के पास लौट आए थे। कई इंटरव्यू में महेश भट्ट ने परवीन बॉबी के साथ अपने रिश्ते को माना भी है। इसके अलावा उनका बेटा राहुल भट्ट भी मुंबई हमले की साजिश के आरोपी डेविड हेडली से संपर्कों की वजह से शक की जद में आया था। तब ये आरोप लगा था कि डेविड हेडली ने राहुल भट्ट को ये कहा था कि वो हमले वाले दिन दक्षिणी मुंबई की ओर नहीं जाए। राहुल भट्ट जब संदेह के घेरे में थे तो उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में महेश भट्ट पर भी निशाना साधा था। खैर ये मुद्दे अब खत्म हो चुके हैं लेकिन अतीत बहुत जल्द पीछा छोड़ते नहीं।

बात बॉलीवुड और ड्रग्स की करते हैं। लगातार दो मामलों में ड्रग की बात सामने आने के बाद, खासतौर पर सुशांत सिंह राजपूत केस में जिस तरह से हिंदी फिल्मों की दुनिया शक के घेरे में आई उसको साफ करना जरूरी है। ये जिम्मेदारी बॉलीवुड को ही उठानी होगी। सुशांत सिंह केस के दौरान सुपरस्टार अक्षय कुमार ने एक वीडियो जारी कर माना था कि कई ऐसे मुद्दे हैं जिनपर बॉलीवुड को खुद के गिरेबां में झांकने की जरूरत है। नारकोटिक्स और ड्रग्स की बात करते हुए भी उन्होंने कहा था कि कैसे दिल पर हाथ रखकर कह दें कि ये समस्या नहीं है,ये समस्या है। तब अक्षय ने पूरी इंडस्ट्री को बदनाम दुनिया की तरह नहीं देखने की अपील भी की थी। अक्षय ने ठीक कहा था, सबको एक ही रंग से रंगना उचित नहीं है। हर जगह अच्छे और बुरे लोग होते हैं। इस कड़ी में ही बॉलीवुड की कई प्रोडक्शन कंपनियों और उनके संगठनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में दो चैनलों की रिपोर्टिंग के खिलाफ गुहार लगाई थी। यहां ये रेखांकित करना जरूरी लगता है कि हाईकोर्ट से गुहार लगानेवाली इन प्रोडक्शन कंपनियों में महेश भट्ट की कंपनी शामिल नहीं हैं। बॉलीवुड के जिन लोगों ने अदालत से गुहार लगाई है उनको महेश भट्ट पर लग रहे आरोपों पर भी अपनी बात रखनी चाहिए। प्रोड्यूसर गिल्ड को कम से कम ये बयान तो जारी करना चाहिए कि अभिनेत्री लवीना के आरोपों की जांच हो, ड्रग्स सप्लाई के आरोपों को लेकर भी एजेसियां कानूनसम्मत ढंग से काम करें।

अगर गिल्ड या प्रोडक्शन कंपनियों का ऐसा कोई बयान नहीं आता है या वो कोई पहल नहीं करते हैं तो एक बार फिर से उनकी साख पर सवाल उठेगा और लोगों को बॉलीवुड पर आरोप लगाने का मौका। चुनी हुई चुप्पी और चुनिंदा मामलों में बोलना दोनों ही किसी भी संगठन या इंडस्ट्री की साख पर असर डालते हैं। हमने अपने देश में देखा है कि वामपंथियों ने सालों तक इस चुनी हुई चुप्पी या सेलेक्टिव सेक्युलरिज्म को अपनाया। आज इस वजह से उनको कितना नुकसान हुआ ये सबके सामने है। उनकी राजनीतिक जमीन देखते देखते उनके नीचे से खिसक गई। उनकी साख इस कदर छीज गई है कि अकादमिक दुनिया ने भी उनको गंभीरता से लेना कम कर दिया है। बॉलीवुड में ड्रग्स का नाम भी आता है तो वहां काम कर रहे संगठनों को बहुत मुखरता के साथ उसका प्रतिरोध करना होगा। इससे लोगों के बीच बॉलीवुड की साख और मजबूत होगी अन्यथा लोगों को ये लगेगा कि फिल्मी दुनिया के बड़े और गंभीर मानी जानेवाली आवाज भी चुनिंदा लोगों के आरोपों पर ही अपनी बात सामने रखती है। 


Wednesday, November 6, 2019

पुस्तक केंद्र की खलती कमी


दिल्ली में अब भी बहुत कम ऐसी जगह हैं जहां साहित्य की हर विधा की पुस्तकें मिलती हों। सामने लॉन हो जहां बैठकर चाय कॉफी का लुत्फ लिया जा सके। कॉफी हाउस की जगह पर पालिका बाजार बनने के बाद मोहन सिंह प्लेस के कॉफी हाउस में साहित्यकारों की बैठकी जमा करती थी। लेकिन एक जगह ऐसी थी जहां साहित्यकारों के अलावा रंगकर्मी से लेकर संस्कृतिक्रमी तक जुटा करते थे। ये जगह थी श्रीराम कला केंद्र के भूतल पर स्थित वाणी पुस्तक केंद्र। उससे सटा एक कैफेटेरिया भी था और सामने लॉन । वाणी पुस्तक केंद्र में देशभर की साहित्यिक पत्रिकाएं एक जगह मिल जाया करती थीं। कैफेटेरिया में चाय-कॉफी। साहित्य चर्चा के लिए बेहद मुफीद जगह भी और वातावरण भी। वाणी पुस्तक केंद्र के मालिक अरुण माहेश्वरी के मुताबिक ये केंद्र सन 2000 में खुला था। पत्रकार सुरेन्द्र प्रताप सिंह को कहीं से ये जानकारी मिली कि श्रीराम कला केंद्र वाले अपने परिसर में एक पुस्तक की दुकान चलवाना चाहते हैं। सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने इसकी चर्चा अपने मित्र पत्रकार राजकिशोर से की। राजकिशोर ने इस पुस्तक केंद्र के लिए वाणी प्रकाशन के मालिक अरुण माहेश्वरी को तैयार कर लिया। इस तरह से इस केंद्र की शुरुआत हुई थी। इस केंद्र का शुभारंभ पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और फिल्मकार महेश भट्ट ने किया था। शुभारंभ के मौके पर उस वक्त अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे मनोज वाजपेयी ने कवि चंद्रकांत देवताले की कविताओँ का पाठ किया था। अरुण माहेश्वरी बताते हैं कि चंद्रशेखर पुस्तक प्रेमी थे। चंद्रशेखर जी को जब इस बात का पता लगा कि मंडी हाउस के पास एक ऐसा पुस्तक केंद्र खुल रहा है तो वो इसका शुभारंभ करने के लिए फौरन तैयार हो गए थे। वो समय पर आए काफी देर तक रुके भी थे। हिंदी साहित्य जगत के तमाम बड़े लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी भी इसके शुभारंभ के मौके पर उपस्थित थे।
इसके शुभारंभ समारोह को लेकर अरुण माहेश्वरी ने दैनिक जागरण के साथ अपनी बहुत सारी यादें साझा की। एक दिलचस्प बात उन्होंने बताई। उद्घाटन समारोह के लिए उन्होंने फिल्मकार महेश भट्ट से चर्चा की। महेश भट्ट ने उनको कविता पाठ के लिए मनोज वाजपेयी का नाम सुझाया और कहा कि ये लड़का मुंबई में फिल्मों में नाम करने लगा है। महेश भट्ट ने कहा था कि वो एक दिन बहुत बड़ा स्टार बनेगा। तबतक मनोज की दो तीन फिल्में आ चुकी थी। महेश भट्ट ने मनोज वाजयेपी का नंबर दिया और फिर अरुण माहेश्वरी के निमंत्रण पर मनोज वाजयेपी दिल्ली आ गए। मनोज दिल्ली एयरपोर्ट से खुद ही टैक्सी लेकर हिमाचल भवन पहुंच गए थे। उस वक्त मनोज वाजपेयी को हिमाचल भवन में ठहराया गया था क्योंकि वो जगह समारोह स्थल के बहुत पास था। कार्यक्रम के दौरान मनोज वाजपेयी ने चंद्रकांत देवताले की कविताओं को पाठ किया था, जिसको उपस्थित सभी लोगों ने काफी सराहा था। अरुण माहेश्वरी के मुताबिक कार्यक्रम के बाद उन्होंने मनोज वाजपेयी को धन्यवाद दिया और कुछ तोहफा देने की इच्छा जताई। मनोज ने तब अरुण माहेश्वरी से कहा था कि अगर तोहफा देना है तो उदय प्रकाश का संग्रह ‘तिरिछ’ दे दीजिए। ये संग्रह मंगवाकर मनोज वाजपेयी को गिफ्ट दिया गया था। उस वक्त उदय प्रकाश की कहानी ‘तिरिछ’ की काफी चर्चा थी।
ये तो रही उद्घाटन समारोह की दिलचस्प कहानी लेकिन उसके बाद श्रीराम कला केंद्र स्थित ये पुस्तक केंद्र दिल्ली की साहित्यिक बिरादरी का प्रमुख केंद्र बन गया। इसकी वजह वहां साहित्यिक पत्रिकाओं की उपलब्धता तो थी ही वहां का माहैल भी रचनात्मक था। ये जगह दिल्ली की सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र में भी थी। करीब दस साल तक ये वाणी पुस्तक केंद्र चलता रहा था लेकिन एक दिन अचानक लैंड एंड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट ने इमारत के मालिकों को परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने पर रोक लगाने का नोटिस दे दिया। थोड़े दिन की बातचीत के बाद दिल्ली का ये साहित्यिक केंद्र बंद कर दिया गया। पुस्तक केंद्र बंद होने के कुछ दिनों बाद तक कैफेटेरिया चलता रहा लेकिन फिर वो भी बंद हो गया, फिर खुला। उसके बंद होने के बाद तो लेखकों के मिलने जुलने का एक स्थान खत्म हो गया। दरअसल इस स्थान की उपयोगिता इस वजह से भी थी कि जो भी श्रीराम कला केंद्र में नाटक देखने आता था उनके लिए भी ये जगह मुफीद थी। लेकिन एक सरकारी नोटिस ने इस बेहतरीन साहित्यिक केंद्र को बंद कर दिया।